नई दिल्ली। महाराष्ट्र में विधानसभा निलंबित होने के सथ ही राष्ट्रपति शासन भी लागू हो गया है। राष्ट्रपति शासन लागू होने के साथ ही कई राजनीतिक दलों का सरकार बनाने का सपना भी टूट गया है। राष्ट्रपति ने विधानसभा को निलंबित करते राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी। इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई थी। बता दें कि इससे पहले राज्यपाल ने बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी को सरकार बनाने का मौका दिया था।
इस बीच गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि महाराष्ट्र के राज्यपाल का मानना था कि चुनावी प्रक्रिया समाप्त हुए 15 बीत गए हैं और कोई भी राजनीतिक दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, इसलिए राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना बेहतर होगा। गृह मंत्रालय का कहना है कि राज्यपाल की तरफ से राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करते हुए कहा गया था कि राज्य में संविधान के मुताबिक सरकार गठन मुश्किल नजर आ रहा है। राज्यपाल ने अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल करते हुए सूबे में राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा की।
महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से जारी सियासी उथल-पुथल के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राज्य में राज्यपाल शासन को मंजूरी दे दी है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपनी सिफारिश में कहा था राज्य में कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है इसलिए यहां राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए।
गृह मंत्रालय ने कहा कि राज्यपाल की रिपोर्ट कहती है कि उनकी तरफ से हर संभव कोशिश के बाद भी महाराष्ट्र की सरकार का गठन संविधान के मुताबिक नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में राज्यपाल के पास राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 356 के मुताबिक यह अनुशंसा की है।


