उदयपुर,(ARLive news)। दिल्ली में पुलिस के साथ वकीलों के मारपीट करने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ कि आज बुधवार को उदयपुर कोर्ट परिसर में वकीलों के हंगामे के वीडियो बना रहे पुलिस कर्मी के साथ मारपीट करने वाले वकीलों के खिलाफ भूपालपुरा में एफआईआर दर्ज हो गयी है।
एडीशनल एसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा ने बताया पुलिस कर्मी दाना राम जिला पुलिस की डीएसबी शाखा में कांस्टेबल है। कोर्ट में वकील और उनके मुवक्किल के बीच झगड़ा मारपीट हुई थी। जिसको लेकर सभी वकील कोर्ट परिसर की पुलिस चौकी पहुंचे। पुलिस वकील के साथ मारपीट करने वाले उनके क्लाइंट को भी चौकी पर ले आयी थी। चौकी पर मौजूद जिला एसपी कार्यालय के डीएसबी शाखा का जवान दाना राम घटनाक्रम का वीडियो बनाने लगा। तो वकीलों के एक समूह ने कांस्टेबल दाना राम से उसका मोबाइल छीन कर तोड़ दिया, दानाराम से मारपीट की, जिसमे उसके कपड़े तक फाड़ दिए।
दाना राम की रिपोर्ट पर भूपालपुरा थाने में मारपीट करने वाले वकीलों के खिलाफ मारपीट और राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज किया है। इधर वकील ने मारपीट करने वाले मुवक्किलों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करवाई है।
वकीलों ने कांस्टेबल का मोबाइल तोड़ कपडे तक फाड़ दिए
गौरतलब है कि बुधवार दिन में वकील सुरेन्द्र मेनारिया से क्लाइंट संतोष जोशी और भास्कर सांखला मिलने आए थे। बातचीत के दौरान संतोष और भास्कर सांखला अचानक आक्रोशित हो गए और वकील सुरेन्द्र मेनारिया से मारपीट करने लगे। यह देखकर इकट्ठे हुए वकीलों ने सुरेन्द्र मेनारिया को बचाया और मारपीट करने वाले संतोष व भास्कर की पिटाई कर दी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और संतोष व भास्कर को पकड़कर थाने लाने लगी।
कोर्ट परिसर में हो रहे हंगामे और इस पूरे घटनाक्रम का जिला पुलिस के डीएसबी शाखा का कांस्टेबल दाना राम वीडियो बना रहा था। वीडियो बनाते देख वकीलों ने उसके साथ ही मारपीट और धक्का-मुक्की कर दी और मोबाइल तोड़ दिया। मामला बिगड़ता देख पुलिस ने सीआईडी के पुलिसकर्मी को वहां से निकाला। इसके बाद सभी थाने पहुंचे।
वकील सुरेन्द्र मेनारिया ने उनके साथ हुई मारपीट के आरोप में क्लाइंट संतोष और भास्कर सांखला के खिलाफ रिपोर्ट तो हांथो हाथ दर्ज हो गयी थी, लेकिन कांस्टेबल से मारपीट मामले को पहले खत्म करने का प्रयास किया गया। हालांकि मामला उच्च स्तर पर जाने पर अधिकारियों के आदेश पर कांस्टेबल की ओर से वकीलों के खिलाफ रिपोर्ट ली गयी।
सादा वस्त्रों में था पुलिसकर्मी तो पहचान नहीं पाए : वकील
वकीलों ने बताया कि पुलिसकर्मी के साथ धक्का-मुक्की का कोई इंटेंशन नहीं था। घटनाक्रम का वे वीडियो बना रहे थे, वे सादा वस्त्रों में थे, इससे अन्य वकील उन्हें पहचान नहीं पाए। वकीलों ने उन्हें वीडियो बनाने से रोका और इस दौरान धक्का मुक्की हो गयी।
यहां वकीलों से प्रश्न यह भी है कि, मान लिया जाए कि वे पुलिसकर्मी के सादा वस्त्रों में होने से उन्हें पहचान नहीं पाए होंगे, तो क्या वे आम आदमी के साथ मारपीट करेंगे..? अगर कोर्ट परिसर में हो रहे हंगामे या किसी घटनाक्रम का कोई आम आदमी भी वीडियो बना रहा है, तो क्या वकीलों का समूह उसके साथ मारपीट करेगा..?


