नई दिल्ली,(ARLive news)। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को इस्लामी कानून के तहत निकाह करने वाली मुस्लिम युवती को व्यस्क होने तक पति के साथ रहने का अधिकार नहीं है वाले मसले पर सुनवाई की। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लड़की के निकाह को अवैध करार दिया है, क्योंकि वह 16 साल की है। इसी आदेश को लड़की ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी है।
जिसपर अदालत ने एक अक्टूबर को लड़की, उसके पिता और पति को बुलाया है ताकि फैसला सुनाया जा सके। न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना की पीठ ने कहा कि वह नाबालिग लड़की, उसके पिता और पति के साथ बातचीत करेंगे। उन्होंने रजिस्ट्री से उस अनुरोध के बारे में पूछा जिसमें एम्स की एक महिला मनोरोग चिकित्सक को लड़की से बात करने के लिए बुलाया जाएगा।


