उदयपुर,(ARLive news)। जिले के हिंता, धारता सहित पांच गांवों में भूजल प्रबंधन की मारवी योजना के सफल परिणाम के बाद गुरूवार को इसके अनुभव पर आधारित तीन किताबों हमारा भूजल, मारवी भूजल सुप्रबंधन का अनूठा प्रयोग और भूजल कहानियां का लोकार्पण किया।इस अवसर पर मौजूद देश के वाटर मैन मैग्सेसे अवॉर्डी राजेन्द्र सिंह ने देश में गंगा की स्थिति पर कहा कि हमारी गंगा मां को ह्दय की बीमारी है, लेकिन सरकार ने उसके लिए जो प्रोजेक्ट बनाया है, उसमें उसके जबड़ा ठीक किया जा रहा है। राजेन्द्र सिंह ने कहा गंगा की बात उदयपुर में करना इसलिए भी जरूरी है, क्यों कि उदयपुर भी गंगा का बेसिन है।
राजेन्द्र सिंह ने कहा देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाषण में गंगा के लिए 20 हजार करोड़ खर्च कर उसकी पुरानी स्थिति वापस लाने की बात कही थी। लेकिन वह 20 हजार करोड़ रूपए व्यर्थ बह रहा है। क्यों कि गंगा को साफ करने के बजाए उसके फ्रंट व्यू डवलपमेंट पर काम हो रहा है। गंगा को मैला ढोने वाली मालगाड़ी बना दिया गया है।
देश की सातों आईआईटी, कई यूनिवर्सिटी, पर्यावरण विद सहित कई वैज्ञानिकों और रिसर्च रिपोर्ट के आधार पर गंगा के लिए जो प्लान तैयार किया गया था, उसे तो इस केन्द्र सरकार ने रिजेक्ट कर दिया। अब गंगा के प्रोजेक्ट पर जो भी काम कर रहे हैं, उनमें अधिकतर गुजरात से आए हैं। जिस तरह से अभी काम हो रहा है, उससे तो गंगा कभी साफ नहीं होगी। हमारी गंगा मां अभी आईसीयू पर है और सही इलाज नहीं हुआ तो वह मर जाएगी। इस अवसर पर कार्यक्रम में सात सालों से मारवी योजना में लगी टीम के विशेषज्ञ, मुख्य सदस्य मौजूद रहे।
उदयपुर का मॉडल अब देश-विदेश में अपनाया जा रहा
प्रोफेसर बसंत माहेश्वरी ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया सेंटर फॉर इंटरनेशनल एग्रीकल्चर रिसर्च के वित्तीय सहयोग से उदयपुर के पांच गांव और गुजरात के छह गांवों में मारवी योजना 2011 में शुरू की गयी थी। इस योजना में ग्रामीणों को जोड़ा और आज यह योजना इतनी सफल हो चुकी है उदयपुर के इस मॉडल को देश के अन्य राज्य और विदेशों में भी अपनाया जा रहा है। हम इस योजना के जरिए लोगों में वाटर लिट्रेसी लेकर आए हैं, लोगों ने भूजल को समझा है, इसलिए इसे जुड़े।
देश में सरकारें चन्द्रयान तक पहुंचने की बात कर रही हैं, लेकिन भूजल को वे नहीं समझ पायी हैं। देश का असली रिजर्व बैंक भूजल है, लेकिन आज यही खाली हो रहा है।
दसवीं तक के बच्चों को पढाई जाएं किताबें
प्रोजेक्ट से जुड़े वीवीआरआई के प्रिंसीपल डॉ. अनिल मेहता ने बताया कि जिन किताबों का आज लोकापर्ण हुआ है, वे जल साक्षरता के लिए एक संसाधन पुस्तक
हैं। इससे लोगों में भूजल संवर्धन, संरक्षण के प्रति जागरूकता आएगी। इन किताबों को स्कूल में दसवीं तक के छात्रों को पढ़ाई जानी चाहिए, ताकि उनके वाटर लिट्रेसी डवलप हो।
विकसित देशो के पानी में जो प्रदूषक तत्व हैं, वे उदयपुर में भी पाए गए
डॉ. अनिल मेहता ने चिंता जताते हुए बताया कि इस प्रोजेक्ट में कई सर्वे औररिसर्च हुई हैं। इसमें एक चिंताजनक बात सामने आयी है कि विश्व के कई विकसित देशों के पानी में जो प्रदूषक तत्व पाए गए हैं, वह उदयपुर के भूजल में भी हैं। ऐसे में भूजल की गुणवत्ता सुधार पर ध्यान देना जरूरी हो गया है।
वाटर सिक्योरिटी एक्ट और वाटर राइट एक्ट लाना जरूरी
वाटर मैन राजेन्द्र सिंह ने कहा देश में भूजल संरक्षण को लोग तब समझेंगे जब देश में वाटर सिक्योरिटी एक्ट और वाटर राइट एक्ट लागू होगा। पानी पर जब सबका समान अधिकार होगा तो आमजनता इस पर अपना हक समझेगी और तब नीचे स्तर से जल संरक्षण होगा। अभी पानी व्यापार की चीज बन गया है। राजेन्द्र सिंह ने एक कंपनी का नाम लेते हुए कहा कि यह कंपनी देश के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी से भी ज्यादा घातक साबित होगी। अभी इसने देश के 18 राज्यों में एक-एक शहर ले लिया है और यहां पानी पर व्यापार करना शुरू कर दिया है। अभी यह पानी पर काम करेगी और फिर देश के पानी पर मालिकी ले लेगी, यह स्थिति बेहद भयानक होगी।

