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मुंबई के टिफिन सेंटर से दयनीय हालात में रेस्क्यू हुए उदयपुर के बच्चे : वो तीन साल भयानक सपने से भी ज्यादा बुरे थे

7 बच्चों ने बतायी अपनी व्यथा, कहा जेल जैसा था टिफिन सेंटर, 18 घंटे काम करने के बाद बाहर निकलना मना था

arln-admin by arln-admin
September 9, 2019
Reading Time: 1 min read
udaipur child labour rescued in mumbai at tifin center


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मुंबई/उदयपुर,(ARLive news)। उदयपुर के सायरा ब्लॉक के रहने वाले 4 बच्चों सहित अलग-अलग प्रदेश के 7 बच्चे मुंबई के कुरला स्थित एक टिफिन सेंटर से बेहद दयनीय और बुरे हालात में रेस्क्यू किए गए हैं। दलाल और टिफिन सेंटर संचालक परिजनों को बच्चों की अच्छी जिंदगी का भरोसा दिलाकर लेकर गए थे, लेकिन उनके साथ उसका बिलकुल उल्टा हुआ।

इसका खुलासा मुंबई के कुरला क्षेत्र में हुई एक कार्यवाही के दौरान हुआ, जब एक टिफिन सेंटर से उदयपुर के सायरा ब्लॉक के 4 बच्चों सहित 12 से 15 साल के 7 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। पुलिस ने भंवरलाल परिहार, टिफिन सेंटर संचालक सुशांत और मांगीलाल कुल तीन लोगों के खिलाफ जेजे एक्ट में मामला दर्ज कर लिया है। मुंबई पुलिस इन पर एससी/एसटी एक्ट भी लगाने की तैयारी में है, ताकि बच्चों का शोषण करने वाले इन आरोपियों को सख्त से सख्त सजा मिल सके।

टिफिन सेंटर नहीं, जेल थी वह

बच्चों ने बताया कि उनसे टिफिन सेंटर पर 18-18 घंटे काम लेने के बाद भी भरपेट न तो भोजन मिलता था और न ही किसी बीमारी में दवाई दिलवाई जाती थी। टिफिन सेंटर से बाहर निकलना मना था, पूरे समय टिफिन सेंटर की बिल्डिंग में ही रहते थे। माता-पिता से बात तक नहीं करते देते थे। इतना शोषण और काम करवाने के बाद भी टिफिन सेंटर संचालक वेतन तक नहीं दे रहा था। किशोर ने कहा वह मेरे लिए एक भयानक सपना था, जिसे मैंने तीन साल तक जिया। वह काम या बिल्डिंग नहीं, बल्कि जेल थी।

एक बच्चा बीमार पड़ा तो हुआ खुलासा

 आजीविका ब्यूरो के प्रोग्राम मैनेजर संतोष पूनिया ने बताया कि 2016 में उदयपुर के सायरा ब्लॉक निवासी 14 वर्षीय किशोर को दलाल मुंबई में काम दिलवाने की कहकर उदयपुर से ले गया था। दलाल ने उसके माता-पिता को भरोसा दिलाया था कि बच्चे को वहां अच्छा जीवन, खान-पान और रहने की जगह मिलेगी और वह अच्छी जिंदगी जी सकेगा। इस पर मां-बाप ने बच्चे को उसके साथ भेज दिया। वहां जाने के बाद किशोर को काफी शोषण का सामना करना पड़ा। टिफिन संचालक किशोर से उसके माता-पिता की बात तक नहीं करवाने देता था। उसे न तो भरपेट खाना मिलता था, न बीमारी में दवाई, न बाहर निकल सकता था।

रेस्क्यू हुए 7 बच्चों में 4 सायरा के

एक साल पहले किशोर के 12 साल के छोटे भाई को भी परिजनों से बात कर वह दलाल टिफिन सेंटर संचालक के साथ मिलीभगत कर मुंबई ले आया और उसे भी उसी काम में लगा दिया। इस प्रकार से वहां पर उदयपुर के सेमारी ब्लॉक के चार किशोर बड़ी ही दयनीय हालत में काम करने को मजबूर हो गए थे।

पिछले दिनों कुपोषण, बीमार हालत में भी बिना उपचार के कई-कई घंटों काम करने से किशोर की तबियत बहुत खराब हो गयी। इस पर टिफिन सेंटर संचालक ने उसका इलाज करवाने के बजाए उसे वापस गांव सायरा भेज दिया। कुछ दिन तो किशोर बहुत सहमा और घबराया रहा। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उसने माता-पिता को उसके साथ हुए हर शोषण के बारे में बताया और कहा कि छोटा भाई भी वहां यह सबकुछ झेल रहा है।

टिफिन सर्विस की बात कर लिया पता और पहुंच गयी टीम

आजीविका ब्यूरो प्रोग्राम मैनेजर संतोष पूनिया ने बताया कि किशोर के परिजनों ने आजीविका ब्यूरो से संपर्क किया। हमने प्रशासन से संपर्क किया। किशोर से मुंबई में कुरला स्थित टिफिन सेंटर की लोकेशन पूछी, तो बताया कि उसे वहां से कभी निकलने नहीं देते थे, वह सेंटर जानता है, लेकिन कुरला के अलावा, सेंटर तक पहुंचने का रास्ता नहीं जानता।

इस पर संतोष पूनिया ने आजीविका ब्यूरो, लेबर हेल्प लाइन और स्थानीय प्रशासन का सहयोग लेकर टिफिन सेंटर वाले को फोन कर टिफिन सर्विस शुरू करवाने की बात कही और वहां तक पहुंचने का रास्ता पता कर लिया। कुरला की कलेक्टर की परमीशन के बाद जब स्थानीय पुलिस के साथ टीम ने वहां दबिश दी तो बच्चे काम करते हुए मिले।

वहां से 7 बच्चों को रेस्क्यू किया। इनमें 4 बच्चे उदयपुर के सायरा, एक उत्तर प्रदेश, एक पश्चिम बंगाल और एक झारखंड का है। सभी को कुरला में सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश किया गया। उनके रिलीज ऑर्डर प्राप्त हो गए हैं, जल्द ही ये सभी बच्चे अपने-अपने घर अपनों के बीच खुली हवा में सांस ले सकेंगे।

Tags: #childLabour#mumbai#UdaipurChildLobourudaipur

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