AR Live News
Advertisement
  • Home
  • About us
  • National
  • Rajasthan
  • Udaipur
  • Uttar Predesh
  • Gujarat (Hindi)
  • International
  • Expert Articles
  • Education
  • Entertainment
  • Youtube
  • Photo Gallery
  • Contact us
No Result
View All Result
  • Home
  • About us
  • National
  • Rajasthan
  • Udaipur
  • Uttar Predesh
  • Gujarat (Hindi)
  • International
  • Expert Articles
  • Education
  • Entertainment
  • Youtube
  • Photo Gallery
  • Contact us
No Result
View All Result
AR Live News
No Result
View All Result
Home Home

सीवरेज मेनहॉल हादसा : जहरीली गैस से हुई चारों की मौत, दो ठेका कंपनियों पर मुकदमा दर्ज

सीवरेज का काम करने वाली कंपनी डीआर अग्रवाल ने परिजनों को दिया 4.50-4.50 लाख रूपए का मुआवजा

arln-admin by arln-admin
August 29, 2019
Reading Time: 1 min read
udaipur sewage main hall accident 4 die due to poisonous gas


Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp
क्या टेंडर खुलने के बाद कंपनी कार्य को अपने अधीन किसी दूसरे कंपनी को सबलेट कर सकती है..?

उदयपुर,(ARLive news)। हिरणमगरी थाना क्षेत्र के मनवाखेड़ा में सीवरेज के मेनहॉल में उतरे चार श्रमिकों की मौत जहरीली गैस से दम घुटने के कारण ही हुई थी। इस बात का खुलासा चारों मृतकों के पोस्टमार्टम के बाद हुआ है।सीवरेज का काम करने वाली गुजरात के बड़ौदा की कंपनी दिनेश चन्द्र आरआर अग्रवाल (डीआर अग्रवाल कंपनी) के प्रतिनिधि मोरचरी में मौजूद रहे। कंपनी प्रतिनिधियों ने चारों मृतकों के परिजनों को 4.50-4.50 लाख रूपए के चेक दिए, इसके बाद परिजनों से लिखित में लिया कि वे अब कंपनी पर किसी भी प्रकार के हर्जाने का मुकदमा नहीं करेंगे।

थानाधिकारी हनुवंत सिंह ने बताया कि मृतक के परिजनों ने सीवरेज लाइन के कार्य का ठेका लेने वाली कंपनी डीआर अग्रवाल और इसके अधीन कार्यरत कंपनी प्रोजेक्टी बिल्ड होम के अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 304ए के तहत मामला दर्ज करवाया है। आरोप लगाया है कि कंपनी अधिकारियों ने कार्यरत कान सिंह, धर्मचंद, कैलाष और प्रहलाद को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सीवरेज मेन हॉल में उतार दिया था, वहां दम घुटने से उन चारों की मौत हो गयी। कंपनी अधिकारियों की लापरवाही से यह हादसा हुआ और चारों की मौत हुई है।

मौत का कारण जहरीली गैस है, करंट नहीं : एफएसएल, पोस्टमार्टम और पुलिस के तकनीकी बिंदुओं अनुसार

: दो मृतकों के मुंह से झाग निकल रहा था, ऐसा तभी होता है, जब कोई जहरीली वस्तु या गैस शरीर के अंदर गयी हो।

: पोस्टमार्टम में बॉडी के ऑर्गन पर जहरीली गैस का असर पाया गया।

: मेडिकल बोर्ड ने सभी के विसरा सैंपल लिए हैं। ताकि मृत्यु के कारणों की विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट मिल सके।

: मेनहॉल दो महीने से बंद था और उसमें नाले का रिस कर आया करीब डेढ़ फीट गंदा पानी भरा था। 19 फीट गहरायी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, ऐसे में संभवना है कि ऑक्सीजन की मात्रा कम होने और बंद मेनहॉल में भरे गंदे पानी से जहरीली गैस बन गयी और जैसे ही एक-एक कर चारों श्रमिक मेनहॉल में उतरे दम घुटने से चारों की मौत हो गयी।

करंट से मौत के कारण को नकार रहे विषेषज्ञ डॉक्टर और पुलिस

: मौके पर करंट के लक्षण इसलिए नहीं पाए गए, क्यों कि चारों मृतकों में से किसी की बॉडी पर करंट लगने जैसा कोई निशान नहीं था, जबकि वहां से 11 केवी की लाइन गुजर रही थी, जिससे करंट लगने पर वह हिस्सा काला पड़ जाता।

: पोस्टमार्टम में भी करंट से मौत होना कारण नहीं पाया गया। बताया गया कि करंट से खून सूख जाता है, बॉडी या बॉडी का संबंधित अंग काला पड़ जाता है या वह हिस्सा जहां से करंट का शरीर में प्रवाह हुआ, वहां निशान बनता है, लेकिन चारों की बॉडी पर ऐसा कोई निशान नहीं पाया गया।

: मौके पर भी जब बिजली विभाग के इंजीनियर पहुंचे थे और उन्होंने तकनीकी माध्यम से मौके पर करंट के प्रवाह की जांच की थी, लेकिन वहां करंट नहीं पाया गया था।

ठेका लेकर कंपनी ने काम अपने अधीन दूसरी कंपनी को दे दिया 

सीवरेज कार्य करने वाली कंपनी का ठेका निरस्त हो सकता है...?

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत उदयपुर शहर में सीवरेज लाइन डालने के कार्य का ठेका बड़ौदा की डीआर अग्रवाल कंपनी को मिला था। लेकिन ऐसा बताया जा रहा है कि डीआर अग्रवाल ने अपने अधीन एक और कंपनी प्रोजेक्टी बिल्ड होम को यह कार्य सौंप दिया था। शायद यही वजह है कि मृतकों के परिजनों ने दो कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। अगर ऐसा हुआ है तो क्या यह टेंडर के नियमों का उल्लंघन नहीं है…? निगम किसी भी कंपनी को जब काम का ठेका देती है, तो उसकी शर्तें वह कंपनी पूरी करती है, तो ठेका उसको मिलता है। ऐसे में वह कंपनी अपने अधीन किसी अन्य कंपनी को ठेका सबलेट करती है, तो जरूरी नहीं कि उसके पास वह अनुभव और संसाधन हो, जो निगम ने टेंडर खोलते समय शर्तो में आवश्यक बताए हों।

ऐसे में निगम को इस कंपनी का यह टेंडर ही निरस्त कर देना चाहिए। इस मामले की एसीबी जांच भी हो सकती है, क्यों कि इसमें भ्रष्टाचार की मिलीभगत होने की संभावना है।

जिस कंपनी के नाम टेंडर है, वह कार्य सबलेट नहीं कर सकती : महापौर 

नगर निगम महापौर चन्द्र सिंह कोठारी ने बताया कि जिस कंपनी के नाम किसी कार्य का टेंडर खुलता है तो वह कार्य उसी कंपनी को करना होता है, वह अपने अधीन किसी अन्य कंपनी को कार्य सबलेट नहीं कर सकती है। इस मामले में ऐसा हुआ है, तो हम दस्तावेज मंगवाकर पूरी पड़ताल करवा लेते हैं। नियमानुसार कंपनी के खिलाफ जो भी कार्यवाही होगी वह की जाएगी।

Tags: #sewage#sewageLine#UdaipurSewageMainHallAccidentudaipur

visitors

arlivenews
  • Home
  • About us
  • National
  • Rajasthan
  • Udaipur
  • International
  • Expert Articles
  • photo gallery
  • Entertainment
  • Privacy Policy
  • Archives
  • Contact us

© 2019 All Rights Reserved by ARLive News .

error: Copy content not allowed
No Result
View All Result
  • Home
  • About us
  • National
  • Rajasthan
  • Udaipur
  • Uttar Predesh
  • Gujarat (Hindi)
  • International
  • Expert Articles
  • Education
  • Entertainment
  • Youtube
  • Photo Gallery
  • Contact us

© 2019 All Rights Reserved by ARLive News .