उदयपुर,(ARLive news)। शहर के हिरणमगरी थाना क्षेत्र के मनवा खेड़ा में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की तहत निर्माणाधीन सीवरेज लाइन के अंदर उतरे चार मजदूरों करंट लगने से मौत हो गयी। इनमें दो मजदूरों की पहले मौत हो गयी और उनकी आवाज सुनकर बचाने के लिए दो अन्य मजदूर भी सीवरेज लाइन के अंदर उतरा तो वे भी अंदर फंस गए और उनकी भी मौत हो गयी।
हादसे की सूचना पर क्षेत्रवासी मदद के लिए मौके की ओर दोड़े, लेकिन किसी को समझ नहीं आया कि सीवरेज लाइन के अंदर फंसे चार लोगों को कैसे निकाला जाए। सूचना पर पुलिस, नगर निगम की टीम पहुंची, जब तक अंदर फंसे चार लोगों को निकाला गया, उनकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने शव एमबी हॉस्पिटल की मोरचरी में रखवा दिए हैं, सीवरेज लाइन अभी चल नहीं रही है, ऐसे में इसमें गैस बनने और दम घुटने से मौत होने जैसी कोई संभवना न के बराबर है। हालां कि पोस्टमार्टम के बाद ही मृत्यु के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।
बचाव के गम बूट, मास्क और हेलमेट तक नहीं थे मजदूरों के पास

ऐसे में अंदेशा जताया जा रहा है उस लाइन से आए करंट की चपेट में अंदर उतरे मजदूर आए और वे वहीं फंस गए, उनकी मौत हो गयी। अंदर फंसे साथी मजदूरों की आवाज सुनकर वहां मौजूद दो अन्य मजदूर भी सीवरेज लाइन में उतर गए, उन्हें सीवरेज लाइन में दौड़ रहे करंट का अंदाजा नहीं था और जैसे ही वे सीवरेज लाइन के अंदर उतरे वे भी करंट की चपेट में आ गए और उनकी भी मौत हो गयी।
स्मार्ट सिटी में निगम की एक और बड़ी लापरवाही
बताया जा रहा है कि जिस जगह सीवरेज लाइन डाली जा रही थी, वहां पास में विद्युत पोल है और उसकी 11 केवी लाइन के तार अंडर ग्राउंड भी है। लेकिन स्मार्ट सिटी का काम कर रही टीम के विशेषज्ञों ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया और मौके पर मजदूरों को लगा दिया। अंदर विशेषज्ञों की टीम मौके पर मौजूद होती और अंडर ग्राउंड जा रही विद्युत लाइन का ध्यान रखती तो शायद यह दुखद घटना नहीं होती।
महापौर इनकी मौत की जिम्मेदारी लें और पीड़ित परिवारो को मुआवजा दें
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष मोहसीन खान ने बताया कि सीवरेज कार्य में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां हो रही हैं। नगर निगम ने किसी लोकल कंपनी को इतना बड़ा टेंडर दिया है तो एमओयू में सुरक्षा का ध्यान रखने की शर्त भी शामिल की गयी। लेकिन यह सिर्फ कागज में ही रह गयी। मौके पर सीवरेज लाइन का कार्य करने के दौरान किसी प्रकार की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा जा रहा है और न ही इंजीनियर्स मौके पर रहते हैं।
मोहसीन खान ने बताया इतना बड़ा टेंडर एलएनटी कंपनी को देना चाहिए था, जिनका खुद का सेफ्टी डिपार्टमेंट होता है। लेकिन निगम ने लोकल कंपनी को इतना बड़ा टेंडर दिया और उसकी चेकिंग के लिए अपनी कोई टीम भी नहीं बैठायी है। कंपनी मनमाफिक काम कर रही है। ऐसे में इन चार लोगों की मौत की नैतिक जिम्मेदारी महापौर को लेनी चाहिए। मरने वाले सभी युवक थे, जो अपने परिवारों का भरण पोषण कर रहे थे, तो इनके पीड़ित परिवारों को 5-5 लाख रूपए का मुआवजा राशि निगम दे।


