उदयपुर,(ARLive news)। जिले के परसाद रेंज में पिछले 20 दिनों में खौफ का सबब बने आदमखोर पैंथर को वन विभाग के शूटर ने मार दिया है। मंगलवार को आदमखोर पैंथर ने बच्ची का शिकार करने और इससे क्षेत्र में फैले तनाव, उपद्रव के बाद से वन विभाग की टीम लगातार विशेषज्ञों के साथ आदमखोर पैंथर की क्षेत्र में तलाश कर रहे थे।
आज दोपहर करीब दो बजे वन विभाग की टीम को आदमखोर पैंथर वन क्षेत्र के उसी स्थान के आस-पास दिखायी दिया, जहां उसने कल बच्ची का शिकार किया था और झाड़ियों तक लेकर गया था। इसी समय वन विभाग की टीम ने आदमखोर पैंथर को चिह्नित किया और उसे टीम ने ट्रंकुलाइज कर बेहोश किया। इसके बाद आदमखोर पैंथर को गोली मार दी गयी। इसी के साथ परसाद रेंज में आदमखोर पैंथर के आतंक का भी खात्मा हुआ।
सीसीएफ राम करण खैरवा ने बताया कि पैंथर को ट्रंकुलाइज कर पकड़ा गया और फिर उसे शूट किया गया है। पैंथर की देह को पुलिस सुरक्षा के बीच वन विभाग की टीम उदयपुर के पशु चिकित्सालय लेकर आ रही है। यहां उसका मेडिकल बोर्ड के जरिए पोस्टमार्टम होगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्यवाही तय होगी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पता चलेगा कि यह वही पैंथर था या नहीं ?
वन्यजीव विशेषज्ञों ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही तय हो सकता है कि यह पैंथर आदमखोर था या नहीं। वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर काम करने वाले कुछ एनजीओ विभाग के इस कदम के विरोध में हैं। उनका मानना है कि जब पैंथर को ट्रंकुलाइज कर पकड़ लिया गया था तो उसे शूट करने के बजाए कोई दूसरा रास्ता भी अपनाया जा सकता था।
24 साल बाद फिर इतिहास दोहराया
उदयपुर में ऐसा करीब 24 साल बाद हुआ है, जब किसी आदमखार पैंथर को विभाग ने गोली मारकर मारा गया हो। सेवानिवृत सीसीएफ वाइल्ड लाइफ राहुल भटनागर ने बताया कि 1995 में हल्दु घाटी क्षेत्र में एक पैंथर आदमखोर हो गया था। उस तेंदुए के कारण ग्रामीणों में दहशत का माहौल हो गया था। तब चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन से अनुमति लेने के बाद उस पैंथर की तलाश की थी और फिर उसे गोली मार दी गयी थी।
गौरतलब है कि परसाद रेंज में पिछले 20 दिनों में आदमखोर पैंथर ने तीन लोगों को शिकार कर मार दिया था। मंगलवार को आदमखोर पैंथर ने जब एक बच्ची को अपना शिकार बनाया था, इसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे जाम कर दिया था और पुलिस पर पत्थर तक बरसाए थे, पुलिस की गाड़ी जला दी थी। उपद्रव में 15 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। रातभर हाईवे पर तनाव रहा था और अहमदाबाद से आने वाली गाड़ियों को पुलिसकर्मियों ने एहतियातन ऋषभदेव-खेरवाड़ा के बीच ही रोक दिया था। इससे रात भर हजारों सवारियां भी परेशान रहीं। पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों की लगातार समाइश के बाद रात करीब ढाई बजे ग्रामीण हाईवे से हटे थे और फिर बच्ची का शव लेकर पहाड़ी पर बैठे रहे थे। पैंथर के पकड़े और मार दिए जाने के बाद ग्रामीण पहाड़ी से शव लेकर नीचे उतरे।
वन विभाग की टीम पैंथर को मारने के बाद ले जाते हुए :


