उदयपुर,(ARLive news)। आदिवासी बहुल इलाके में माहवारी को शर्म का विषय मानने और इस पर खुलकर बात कहीं करने से किशोरी बालिकाओं में संक्रमण का खतरा रहता है। अतः चुप्पी तोड़ो-खुलकर बात करो अभियान के माध्यम से स्कूली बालिकाओं में माहवारी स्वच्छता के संबंध में जागरूकता पैदा की जाएगी। यह जानकारी कलक्टर आनंदी ने शनिवार को शहर के रेजीडेंसी विद्यालय में जिले के 9 ब्लाॅक के संस्था प्रधानों व नोडल शिक्षकों की हुई कार्यशाला में कही।
जिला कलेक्टर श्रीमती आनंदी ने कहा कि किशोरवय छात्राओ में माहवारी संबधी सामान्य जानकारी का अभाव रहता है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बालिकाओं द्वारा माहवारी को एक बीमारी ही समझा जाता है। इसके बारे में परिवारों में भी इसे एक शर्म का विषय समझा जाता है। ये ही कारण रहता है कि छात्राओं को वास्तविक विषय का ज्ञान ही नहीं हो पाता और बहुत बार कुछ बालिकाओं द्वारा उन दिनों में ऐसे माध्यम उपयोग कर लिए जाते है जो उन्हें संक्रमण की ओर ले जाते हैं।
कार्यशाला का शुभारंभ अतिरिक्त जनजाति आयुक्त अंजलि राजौरिया एवं जिला रसद अधिकारी ज्योति ककवानी ने किया। द्वितीय सत्र में जिला कलेक्टर आनंदी व जिला परिषद सीईओ कमर चैधरी व एडीएम सिटी संजय वासु ने संबोधित किया। तृतीय सत्र में प्रशिक्षु आईएएस शुभमंगला की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी शिवजी गौड़ व मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. दिनेश खराड़ी मौजूद रहे।
6 चरणों में चलेगा अभियान
उन्होंने कहा कि “चुप्पी तोड़ो-खुल कर बात करो“ अभियान के तहत जिले में स्थित 1400 उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 6 से 12वी तक की छात्राओं को कवर किया जाएगा। अभियान छः चरणों में होगा जिसमें प्रथम चरम 8 जुलाई से प्रारंभ किया जा रहा है। प्रथम चरण आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र से प्रारंभ होगा जिसमें कोटड़ा, झाड़ोल, फलासिया तथा सायरा ब्लॉक में अभियान चलेगा। इस अभियान में गीतांजलि मेडिकल काॅलेज व आरएनटी मेडिकल काॅलेज का विशेष सहयोग है। इनके प्रशिक्षु मेडिकोज स्कूलों में जाकर इस अभियान को प्रभावी बनाएंगे।
बालिकाओं की माताओं से होगी बात, दिखाएंगे फिल्म
अभियान के दौरान सभी विद्यालय की छात्राओं तथा उनकी माताओं को यूनिसेफ द्वारा माहवारी स्वच्छता पर बनी फिल्म दिखाई जाएगी तथा उनसे वार्ता की जाएगी। चुप्पी तोड़ो अभियान के साथ ही सभी छात्राओं का एनीमिया चैक अप भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपने स्तर पर भी तैयारियां की जा रही है। वे सभी छात्राएं जो एनीमिक पाई जाती है उनको स्वास्थ विभाग द्वारा आगे का उपचार भी दिया जाएगा और इसका सेक्टरवार बने अधिकारियों द्वारा नियमित फॉलोअप भी किया जाएगा।


