घायल ने मददगार पर लुटेरों का साथी होने की शंका जाहिर कर थाने में दी रिपोर्ट।
उदयपुर,(ARLive news)। राह चलते किसी घायल की मदद करना और उसे हॉस्पिटल पहुंचाना एक मददगार को भारी पड़ सकता है, क्यों कि घायल की रिपोर्ट पर पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। मामला उदयपुर जिले के नाई थाना क्षेत्र का है।
एसएचओ भगवती लाल ने बताया कि देहली गेट स्थित जना स्मॉल फाइनेंस में कलेक्शन का काम करने वाले किशनलाल पुत्र गहरीलाल खटीक ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ लूट की एफआईआर दर्ज करवाई है। रिपोर्ट के अनुसार जना स्मॉल फाइनेंस बैंक महिलाओं के समूह बनाकर उन्हें उसमें रूपए जमा करवाने के बाद लोन भी दिलवाता है और नाई से पई तक गांव-गांव जाकर किश्त कलेक्शन का काम करता है। तीन दिन पहले किशनलाल कलेक्शन कर लौट रहा था। उसके पास बैग में 1 लाख 49 हजार रूपए, टेबलेट चार्जर, एवल्युट मशीन थी।
किशनलाल बाइक से नाई के खेरिया घाटी तक पहुंचा ही था कि पीछे से एक सफेद रंग की बाइक पर तीन लड़के आए और चिल्लाते हुए किशनलाल को रोकने का प्रयास किया। किशनलाल को वो लड़के ठीक नहीं लगे तो उसने बाइक की स्पीड तेज की और गाडी उनसे आगे भगाने की कोशिश की। वह 200 मीटर दूर ही पहुंचा होगा, कि किषनलाल की गाड़ी तेज स्पीड के कारण स्लिप हो गयी। तभी पीछे से वो बदमाश आए और किशनलाल का बैग जिसमें रूपए, दस्तावेज व सामान रखा था लूट कर ले गए।
बदमाश भाग ही रहे थे कि पीछे से एक राहगीर स्कूटी सवार आया। किशनलाल को सड़क पर घायल पड़ा देख और बदमाशों को भागते देख उसने किशनलाल को स्कूटी पर बैठाया और उन बदमाशों का पीछा किया। लेकिन बदमाश तेज स्पीड कर वहां से फरार हो गए। स्कूटी सवार ने घायल किशनलाल को पई हॉस्पिटल पहुंचाया और वहां राहुल नाम व मोबाइल नंबर नोट करवाकर चला गया।
हॉस्पिटल में लिखवाया मोबाइल स्विच ऑफ तो जाहिर की शंका
अब पीड़ित किशनलाल ने थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। जिसमें बाइक सवार उन तीन बदमाशों के साथ ही किशनलाल को हॉस्पिटल पहुंचाकर उसकी मदद करने वाले पर भी शंका जाहिर की है। किशनलाल ने संदेह जताया है कि वह स्कूटी सवार मुझे उन बदमाशों से अलग दिशा में पई हॉस्पिटल लेकर गया और हॉस्पिटल में जो मोबाइल नंबर लिखवाया वो बंद आ रहा है, ऐसे में संभव है कि वह स्कूटी सवार भी लूट के बदमाशों से मिला हो।
पुलिस अब हॉस्पिटल से मिले उस मददगार के मोबाइल नंबर की पड़ताल कर रही है। ऐसा संभव है कि किशनलाल की रिपोर्ट पर उस मददगार को पुलिस की पूछताछ का सामना करना पड़ जाए।


