उदयपुर,(ARLive news)। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की स्पेशल यूनिट ने मंगलवार रात को कार्यवाही करते हुए बजरी के अवैध खनन में पुलिस की मिलीभगत वाली भूमिका का खुलासा किया है। एसीबी एसयू की टीम ने राजसमंद जिले के खमनौर थानेदार महेश चन्द्र मीणा को 20 हजार रूपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। यह राशि थानेेदार परिवादी से खेत से बजरी खनन करने पर भी कार्यवाही नहीं करने की एवज में ले रहा था।
एसीबी एडिएसपी सुरेन्द्र सिंह भाटी ने बताया कि खमनोर थानेदार महेश चन्द्र मीणा को 20 हजार रूपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। परिवादी निचली ओडन, नाथद्वारा निवासी मान सिंह पुत्र नरपत सिंह ने गत दिनों एसीबी कार्यालय आकर शिकायत की थी, कि खेत से बजरी के दोहन पर कार्यवाही नहीं करने की एवज में खमनौर एसएचओ 20 हजार रूपए रिश्वत की मांग कर रहे हैं। परिवादी की शिकायत की 5 जून को एसीबी ने सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत मांगने पुष्टि हो गयी। इस पर आज थानेदार महेश चन्द्र मीणा ने परिवादी को रिश्वत राशि के साथ थाने पर ही बुला लिया। रात को एसीबी ने थानेदार महेश चन्द्र मीणा को परिवादी से रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया।
एसीबी के चंगुल से पहले भी दो बार बच चुका है यह थानेदार
जनकारी के अनुसार थानेदार महेश चन्द्र मीणा पहले भी दो बार एसीबी के चंगुल में आने से बच चुके हैं। वर्ष 2007 में राजनगर थाने में ये बतौर हेडकांस्टेबल पदस्थापित थे, तब इनके 20 हजार रूपए रिश्वत मांगने का सत्यापन एसीबी ने कर लिया था, हालां कि तब ये ट्रेप होने से बच गए थे। इसके बाद देवगढ़ थाने में भी बतौर हेडकांस्टेबल इनके रिश्वत मांगने का मामला आया था, हालां कि तब भी रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार थाने का दूसरा हेडकांस्टेबल हो गया था।
बजरी खनन पर पुलिस की बंधी लेकर खुली छूट देने का खुलासा
एसीबी की इस कार्यवाही ने बजरी खनन माफिया को मिले पुलिस संरक्षण का भी खुलासा कर दिया है। पुलिस किस तरह से मासिक बंधी लेकर माफिया को बजरी खनन करने की खुली छूट दे देती है, यह केस इस बात का भी एक उदाहरण है।


