उदयपुर,(ARLive news)। उदयपुर शहर में हनी ट्रैप कर ब्लैक मेल करने और इस गिरोह में 2 वकीलों और 2 महिलाओं के पकड़े जाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने वकील अशोक टांक, देवेंद्र कुमावत और वंदना, मंजू नाम की दो महिलाओं को पकड़ लिया है। ये लोग पेट्रोल पम्प मालिक सुरेन्द्र को ब्लैक मेल कर 11 लाख रुपये लेते हुए पकड़े गए है।
पुलिस थाने में दोनों महिलाओं और दोनों वकीलों से पूछताछ कर रही है। कुछ वकील पकड़े गए वकीलों के सपोर्ट में थाने पहुंचे, लेकिन जब मामला पता चला तो आधे से ज्यादा वकील लौट गए। एसपी कैलाश चंद्र विश्नोई ने बताया कि मामले के जांच कर रहे है, महिला ब्लैक मेल कर रही थी, इसमे वकीलों का क्या इंवॉलमेंट है, पूछताछ कर रहे है। एडिएसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा ने बताया कि दो महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया गया है और मौके से पकड़े गए दो वकीलों से पूछताछ की जा रही है।
महिला, पुलिस और वकीलों का चल रहा हनी ट्रैप रैकेट
जानकारों के अनुसार उदयपुर शहर में ऐसे गिरोह सक्रिय है। ये अमीर व्यावसाइयों के यहाँ महिला को प्लांट करते है। व्यावसायी के साथ महिला इंटीमेट होती है और रिकॉर्डिग करती है। इसके बाद व्यवसायी को ब्लैकमेल करना शुरू होता है। इसमे थाना पुलिस भी शामिल होती है। थाने पर रिपोर्ट आई है यह कहकर व्यवसायी को धमकाया जाता है, और राजीनामा का दबाव डाला जाता है। फिर वकील सौदा कर पैसे मांगते है। अक्सर व्यावसायी बदनामी के डर मोटी रकम दे देते है।
ऐसा ही हॉस्पिटल रोड स्थित पेट्रोल पंप व्यवसायी के साथ हुआ। महिला व्यवसायी के संपर्क में आयी, फिर 50 लाख की मांग की, थाने में महिला ने परिवाद दिया। पुलिस ने परिवाद को रिकॉर्ड में नही लिया और व्यवसायी को फ़ोन किया कि तुम्हारे खिलाफ दुष्कर्म का परिवाद आया है और राजीनामा का दबाव डाला। फिर वकीलो ने फ़ोन कर 50 लाख रुपये मांगे।
इस मामले में परेशान व्यवसायी ने एसपी की शरण ली और वहां परिवाद दिया। एसपी के निर्देश पर हाथीपोल एसएचओ आदर्श कुमार ने ट्रैप बिछाया। व्यवसायी से रुपये लेने वकील अशोक टांक और देवेंद्र कुमावत और दोनों महिलाएं आयीं, करीब 4 घंटे तक ये रुपये लेने की लोकेशन बदलते रहे, आखिरकार इन चारों ने व्यवसायी को महिला थाने के पास सुनसान जगह बुला लिया। इनके आस-पास घूम रही पुलिस ने इन चारों को व्यवसायी से 11 लाख रूप्ए लेते पकड़ लिया और थाने लेकर आ गयी। व्यावसायी ने ब्लैकमेलिंग के संबंध में महिला और वकीलों से हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी पेश कर दी है। एडी.एसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा दोनो वकीलों और महिला से थाने पर पूछताछ कर रहे है।
कुछ ही थानों में आते है ऐसे मामले

सवाल एसपी ने सुखेर पुलिस को कार्यवाही में इनवॉल्व क्यों नहीं किया
एडिएसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा ने इस गिरोह में पुलिस की मिलीभगत से इनकार कर दिया है। लेकिन यहां सवाल यह भी है कि यह पूरा मामला सुखेर थाना क्षेत्र का था, तो फिर एसपी ने सुखेर पुलिस को इस कार्यवाही से दूर क्यों रखा। संभावना है कि एसपी को यह अंदेशा था कि सुखेर पुलिस को इस कार्यवाही की जानकारी लगेगी तो शायद यह कार्यवाही ही न हो सके।


