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हम बाहरी दुनिया में बढ़ रहे हैं, भीतर से नहीं इसलिए लक्ष्य दूर है : राहुल कपूर जैन

भाषाओं को छोड़ने से हम संस्कार भूल चुके हैं

arln-admin by arln-admin
May 18, 2019
Reading Time: 1 min read
Rahul Kapoor JAIN


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उदयपुर,(ARLive news)। हमारी भाषाएं खत्म हो रही हैं, इसलिए संस्कार खत्म होते जा रहे हैं। हमने माता-पिता के चरण स्पर्श करना छोड़ दिया, बड़े आशीर्वाद देने का तरीका भूल चुके हैं, यही कारण है कि परिवार टूट रहे हैं, बुजुर्ग ही नहीं युवा भी बीमार हो रहे हैं। यह कहना है जाने-माने मोटीवेशनल स्पीकर राहुल कपूर जैन का।

जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (जीतो) की ओर से शौर्यगढ़ में रविवार शाम होने वाले चरण स्पर्श कार्यक्रम से पहले प्रेस वार्ता में राहुल कपूर जैन ने आध्यात्म, विज्ञान के साथ पारिवारिक मूल्यों की बात की। इस दौरान जीतो उदयपुर चेप्टर के चेयरमैन शांतिलाल मेहता, मुख्य सचिव सीए महावीर चपलोत, ट्रस्टी राज सुराणा, विनोद जैन, उदयपुर चेप्टर क्वींस की चेयरपर्सन सोनाली मारू भी मौजूद रहीं।

राहुल कपूर ने कहा किसी भी अपने को बीमारी में साथ की जरूरत होती है, पर हम उन्हें महंगे हॉस्पिटल और दवाई देते हैं। आज से 25 साल पहले युवा तो क्या बुजुर्ग कम बीमार पड़ते थे। हम अपने माता-पिता के पैर दबाने के बाद सोते थे। उनको भी अच्छी नींद आती थी, हम भी चैन से सोते हैं। आज नींद की गोली खाने के बाद भी नींद नहीं आती। राहुल कपूर ने कहा आज हम परिवार के साथ बैठकर हंसना, गुदगुदाना, टीवी देखना, घूमना भूल चुके हैं, सब अपने-अपने लक्ष्य के पीछे भागे जा रहे हैं। लेकिन अपने लक्ष्य को पाने लिए हमें बाहर नहीं भीतर की ओर जाना होगा।

हम चरण स्पर्श करना और बड़े आशीर्वाद देना भूल चुके हैं

पहले चरण स्पर्श पैर छूकर करते थे, आज दूर से ही पैर छूना हो जाता है, बड़े भी पहले आशीर्वाद देते थे खुश रहो, मंगल हो जैसे आशीर्वाद देते थे। लेकिन आज कोई पैर छूता है तो हम बस-बस, ऑल द बेस्ट कहकर आशीर्वाद देते हैं। हम पैर छूना और बड़े आशीर्वाद देने का तरीका भूल चुके हैं। अंग्रेजी सिखाने के चलते हम हमारे बच्चों को हमारी भाषा से दूर कर चुके हैं, इससे हमारे संस्कार भी भूल चुके हैं।

राहुल कूपर ने कहा कि वे रविवार शाम चरण स्पर्श कार्यक्रम में परिवारों के संस्कारों के उत्थान की बात करेंगे, ताकि हम अकेले नहीं पूरे परिवार के साथ आगे बढ़ें।

Tags: #MotivationalSpeaker#RahulKapoorJain

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