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Home Mewar

उदयपुर बना भू माफिया, ऋण माफिया और पुलिस का गठजोड़ स्थान

arln-admin by arln-admin
March 23, 2019
Reading Time: 1 min read
udaipur terror of sudkhor


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पिता-पुत्री की आत्महत्या सहित उदयपुर में हो चुकी ऐसी मौतों का कौन जिम्मेदार।

आत्महत्या पर मजबूर करने वाला माफिया या माफिया पर कार्यवाही नहीं करने वाली पुलिस।

udaipur terror of sudkhorउदयपुर,(ARLive news)। शहर के अंबामाता क्षेत्र में 10 मार्च को पिता-पुत्री की सामूहिक आत्महत्या मामले ने इस समाज और शहर पर एक सवाल खड़ा कर दिया है, सवाल ये कि झीलों की नगरी की पहचान वाला यह शहर क्या अब भू माफिया, ऋण माफिया और पुलिस के गठजोड़ के नाम से न पहचाना जाएगा? इस गठजोड़ पर और कितने लोगों की बली चढ़ाई जाएगी ? आखिर क्यों पुलिस इस गठजोड़ का हिस्सा बन गई है ?

जीते-जी तो पिता-पुत्री को न्याय नहीं मिला, क्या मौत के बाद न्याय मिलेगा ? गठजोड़ का हिस्सा बनी पुलिस क्या पिता-पुत्री की आत्महत्या का अनुसंधान इस ढंग से करेगी कि अपराधियों को सजा दिला सके ? पिता पुत्री की मौत के 14 दिन बाद भी ये सूदखोर अपराधी खुलेआम सीना चौड़ा कर घूम रहे हैं। जब ये पिता-पुत्री जीवित थे तो प्रताड़ना की शिकायत लेकर थाने से लेकर एसपी तक पहुंचे थे, इस उम्मीद के साथ कि शायद कोई मदद मिले जाए, लेकिन जब यहां से उन्हें मदद नहीं, बल्कि ना उम्मीदी मिली। आरोपियों की प्रताड़ना बढ़ने लगी तो ये हताश हो गए कि अब शायद सुकून और इज्जतभरा जीवन जीने का कोई रास्ता नहीं बचा है और इन्होंने मौत को गले लगा लिया।

ऋण माफिया से प्रताड़ित होकर आत्महत्या करने का उदयपुर में यह पहला मामला नहीं है। पहले भी अंबामाता, धानमंडी, घंटाघर, सूरजपोल थाना क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय व्यवसायियों और युवकों की ऋणमाफिया से प्रताड़ना के चलते आत्महत्या करने के मामले हो चुके हैं। सूरजपोल थाना क्षेत्र में दो साल पहले हुए आत्महत्या मामले में तो पीड़िता ने एफआईआर में पुलिस पर आरोपी के साथ मिलीभगत का प्रत्यक्षरूप में आरोप लगाया था। लेकिन इस बार एक पिता के साथ उसी घर की बेटी की आत्महत्या का मामला पहली बार आया। सवाल था कि पिता के साथ क्यों घर की जवान बेटी भी इतनी हताश हो गई कि उसने भी मौत को गले लगाना जिंदगी से बेहतर मान लिया।

पिता-पुत्री के इस आत्महत्या के मामले ने समाज को भी शर्मिंदा किया है। ऐसा समाज जो दरिंदों से पीड़ित बेटी की रक्षा तो नहीं कर सकता, लेकिन समाज में उन ऋणमाफिया और भूमाफिया जैसे दरिंदों को पनपने की जगह देता है जो किसी के घर में घुसकर बेटियों के साथ छेड़छाड़ करते हैं।

इस माफिया ने उस चहकती लड़की को भी सिसकने और मौत को गले लगाने पर मजबूर कर दिया था जिसका पिता इस माफिया के चंगुल में फंस चुका था। उधार देने के बाद मानो इस माफिया ने समझ लिया था कि कर्जदार की बेटी हमारी हर जरूरतों को पूरा करेगी। मानो इस माफिया ने कर्ज देकर मजबूर की बेटी को खरीद लिया था। कर्जदार की बेटी को रास्ते जाते रोकना, उसे प्रताड़ित करना, घर में घुसकर उसका शोषण करना। उसे दरिंदों को बेचने के मंसूबे बनाना और न जाने कैसी-कैसी यातनाएं देना, कि उस बेटी को जिल्लत से भरी जिंदगी से बेहतर मौत लगने लगी।

अफसोस इस बात का भी है कि न तो समाज और न ही पुलिस को इस घर में चीखती सिसकियों की आवाज सुनाई दी। ये सिसकियां मदद के लिए चीखीं और फिर हताश होकर हमेशा के लिए चुप हो गईं। क्यों कमजोरों की रक्षा का दम भरने वाली पुलिस इतना गिर चुकी है कि सिसकियों की आवाज आने पर उसने अपने कान बंद कर लिए। क्यों जब इस माफिया से प्रताड़ित घर के पिता ने थाने में शिकायत दी, एसपी को शिकायत दी थी तो माफिया पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, उल्टा पुलिस ने उस मजबूर पिता के साथ ऐसा व्यवहार किया मानो मुल्जिम वो है। माफिया के खिलाफ शिकायत देकर मानो उसने गलती कर दी हो। क्यो एक पुलिसवाला वर्दी पहनने के बाद ली गई उस कसम को भूल जाता है, जिसमें उसने कमजोर की मदद और बदमाश को सबक सिखाने की बात कही होती है। माफिया से पीड़ित पिता जिस दिन पुलिस के पास गया था, अगर उसे वहां मदद और न्याय मिलने की उम्मीद मिल जाती तो शायद दो जिंदगियां बच सकती थीं।

इसलिए सवाल बार-बार उठता है कि क्या झीलों की नगरी उदयपुर इस माफिया और पुलिस के गठजोड़ से मुक्त हो पाएगा? क्या पुलिस को अपना फर्ज और ड्यूटी याद आएगी ? क्या पिता-पुत्री की मौत को न्याय मिल सकेगा ? या फिर और भी जिंदगियां जीवन से इतनी हताश हो जाएंगी कि उन्हें मौत ज्यादा अच्छी लगने लगेगी।

Tags: #mafiya#sudkhorudaipur

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