
कानून के तहत ब्रांड नेम का रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य हुआ है जो कि ड्रग कंट्रोलर के पास कराना होगा। इसके अलावा बाजार में इस नाम की दूसरी दवा नहीं होने का अंडरटेकिंग भी कंपनियों को जमा कराना होगा।
फिलहाल दवाओं के ब्रांड नेम का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं है। प्रतिस्पर्धा के चलते कई कंपनियों ने मिलते जुलते नामों वाली ब्रांडेड दवा बाजार में उतारी है और मिलते जुलते नामों की वजह से केमिस्ट गलत दवा दे देते हैं। फिलहाल दवाएं जेनेरिक नेम से रजिस्टर होती हैं। इस कानून के बाद अब कंपनियों को जेनेरिक नेम के साथ ब्रांड नेम भी बताना होगा। वहीं 10 हजार से अधिक मिलते जुलते नाम वाली दवाएं फिलहाल बाजार में चल रही हैं और करीब 25 फीसदी दवा बाजार इसके चपेट में हैं।


