
गांधी ने कहा, एक नई लाइन सामने आई है-गायब हो गया। दो करोड़ रोजगार गायब हो गया। किसानों के बीमा का पैसा गायब हो गया। खातों में आने वाला 15 लाख रुपया गायब हो गया। नोटबंदी और जीएसटी में कारोबार गायब हो गया, अब राफेल की फाइलें भी गायब हो गईं।
गांधी ने दावा किया, कोशिश यह कि जा रही है कि किसी भी तरह से नरेंद्र मोदी का बचाव करना है। सरकार का एक ही काम है कि चौकीदार का बचाव करना है। गांधी ने कहा, न्याय सबके लिए होना चहिए। एक तरफ आप कह रहे हैं कि कागज गायब हो गए हैं। इसका मतलब है कि ये सच्चे हैं। इन कागजों में साफ है कि प्रधानमंत्री ने समानांतर बातचीत की है। इनके ऊपर कार्रवाई होनी चाहिए।लेकिन ” हिंदुस्तान में क्रिमिनल इंवेस्टिगेशन सब पर हो सकता है, जो प्रधानमंत्री का विरोध करते हैं, मगर जहां क्लीयर कट प्रधानमंत्री का नाम होता है तो कोई क्रिमिनल इंवेस्टिगेशन नहीं हो सकता।क्यों ? “
उन्होंने आरोप लगाया कि राफेल की आपूर्ति समय पर नहीं हुई क्योंकि मोदी जी अनिल अंबानी को पैसा देना चाहते थे। प्रधानमंत्री ने राफेल सौदे में देरी की, अनिल अंबानी की जेब में 30 हजार करोड़ रुपये डाले। उन्होंने कहा कि यह भ्रष्टाचार का स्पष्ट मामला है और इसमें आपराधिक जांच होनी चाहिए। गांधी ने सवाल किया कि अगर प्रधानमंत्री दोषी नहीं हैं तो फिर जांच क्यों नहीं कराते ? जेपीसी की जांच से क्यों भाग गए?
सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि राफेल विमान सौदे से संबंधित दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी हुए हैं और याचिकाकर्ता इन दस्तावेजों के आधार पर विमानों की खरीद के खिलाफ याचिकायें रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट में राफेल मुद्दे पर दाखिल पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि इस सौदे से जुड़े दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी हो गए हैं। उन्हीं के आधार पर एक अखबार ने खबरें प्रकाशित कीं और याचिकाएं दायर की गईं।


