गुजरात मुख्यमंत्री से लगाई सुरक्षा की गुहार।

संपादक एवं पत्रकार गौरांग पंडया ने आवेदन पत्र में आरोप लगाया है कि सूचना के अधिकार के तहत कुछ जानकारियां मांगी हैं, इन जानकारियों से अशोक कालारिया और पंकज मोदी के भ्रष्टाचार का भांडाफोड़ होने वाला है। मेरी इस सूचना के अधिकार के तहत लगी एप्लीकेशन और उनके भ्रष्टाचार की मुझे जानकारी है, इसकी सूचना अशोक कालारिया और पंकज मोदी को लग चुकी है। ऐसे में मुझे मेरे परिवार पर उनसे जान का खतरा है, गौरांग पंडया ने उन्हें और उनके परविार को सुरक्षा उपलब्ध करवाने और कालारिया-मोदी पर कड़ी कार्यवाही करने की मांग की है। मामला प्रधानमंत्री के सगे भाइयों से जुड़ा होने के कारण सरकारी तंत्र और मीडिया जगत में खलबली मच गई है।
ताजुब्ब की बात यह है कि पत्रकार गौरांग पंड्या को सुरक्षा देने के बजाए मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह अर्जी गांधीनगर पुलिस और जिला मजिस्ट्रेट को भेज दी है और इस आवेदन को गौरांग पंड्या का डाइंग डिक्लरेषन मानकर उल्टा गौरांग पंड्या पर कार्यवाही करने के लिए जिला पुलिस और कलेक्टर को आदेष दिए हैं….!
हमारे साथ कुछ भी हो तो मोदी और कालरिया को जिम्मेदार माना जाए
संपादक गौरांग पंडया ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि सूचना विभाग के निदेशक अशोक कालरिया और विज्ञापन कार्यभार सँभालने वाले डिप्टी निदेशक पंकज मोदी प्रधानमंत्री मोदी के सगे भाई है। प्रधानमंत्री की माता अपने इन्हीं बेटों के साथ रहती हैं और प्रधानमंत्री अपनी मां और भाईयों से मिलने यहां आते रहते हैं।
संपादक गौरांग पंडया ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के सगे भाई इन दो आला अफसरों ने सरकारी नियमो से बाहर जाकर विज्ञापन देने में कथित घोटाले किये है। इसकी जानकारी गौरांग ने सूचना के अधिकार आर.टी.आई. के तहत विभाग में एप्लीकेशन लगाकर मांगी थी। जिसकी भनक मोदी और कालरिया को लग गई है कि उनके कथित भ्रष्टाचार का भांडा फूटने को है, तो ये दोनों कभी भी मुझ पर जानलेवा हमला करवा सकते हैं।
संपादक गौरांग पंडया ने दहशत जताई है कि पंकज मोदी और कालरिया उनके कथित गैर कानूनी काम, भ्रष्टाचार और घोटाले को छुपाने के लिए कुछ भी कर सकते है, उन पर वार भी कर सकते या किसी से करवा सकते है, स्कूल आते-जाते बच्चों को अगवा करवा सकते हैं या उन्हें या परिवार के किस भी सदस्य को सड़क हादसे में मरवा सकते हैं। दबाव डालने और अर्जी वापस लेने के लिए सत्ताधारी आला अफसर उन्हें किसी झूठे पुलिस केस में फंसा सकते है। मेरे या मेरे परविार के साथ कुछ भी हेाता है तो इसके लिए मोदी और कालरिया को जिम्मेदार माना जाए।
गौरांग ने आरोप लगाया है कि मेरा डर इस बात से भी साबित होता है कि मेरे आवेदन पर इन आला अधिकारियों पर कार्यवाही करने के बजाए मुख्यमंत्री कार्यालय ने उल्टा मुझ पर कार्यवाही के आदेश दे दिए हैं। मैने मेरे आवेदन में ऐसा कुछ नहीं लिखा है कि उसे डाइंग डिक्लरेशन माना जाए।
संपादक गौरांग पंडया के गुजराती भाषा में लिखे आवेदन पत्र की प्रति

मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी आदेश
सोर्स : जीएनएस न्यूज एजेंसी




