
संविदा कर्मियों की समस्याओं के निराकरण के लिए ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला की अध्यक्षता में गठित कैबिनेट सब कमेटी ने पहली बैठक में सभी विभागों को इन कर्मचारियों के आंकड़े जुटाने के निर्देश दिए थे। संविदाकर्मियों की मांग है कि उन्हें फिक्स किया जाए या फिर समान काम समान वेतन दिया जाए। फिलहाल संविदाकर्मियों को 6 से 7 हजार रुपये मानदेय मिलता है।
राज्य सरकार लोकसभा चुनाव से पूर्व जन घोषणा पत्र के प्रमुख बिंदुओं को जमीनी धरातर पर उतारना चाहती है। कमेटी के संयोजक ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला ने विभागीय अधिकारियों को संविदा कर्मियों की संख्या के साथ कितनी अवधि से कार्यरत है, सहित सभी आंकड़े लेकर अगली बैठक में आने के निर्देश दिए थे।
जानकारी के अनुसार मनरेगा में 60 हजार से ज्यादा संविदाकर्मी कार्यरत है। इसके अलावा प्रदेश में करीब 24 हजार विद्यार्थी मित्र, 27 हजार पंचायत सहायक, 2400 लोक जुंबिश, 7500 मदरसा, 7500 पैराटीचर, एनआरएचएम कर्मी 4500, 17500 प्रेरक, 4500 कंप्यूटर कर्मी, 1500 फार्मासिस्ट, जनता जल योजना 10 हजार संविदाकर्मी कार्यरत है।
कमेटी के संयोजक बीडी कल्ला ने कहा कि पिछली सरकार ने इन संविदाकर्मियों की स्थिति को लेकर गंभीरता पूर्वक विचार नहीं किया और वे सिर्फ वादे ही करते रहे। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार इनकी समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ हल करने का प्रयास करेगी। वैसे तो संविदाकर्मियों से जुड़े संघ के ज्ञापन मिल चुसके हैं, लेकिन फिर भी अन्य समस्याओं की बात आती है तो संघों के प्रतिनिधियों को बैठक में बुलाया जाएगा, साथ ही अदालतों में चल रहे मामले में क्या निर्णय लिया जाएगा, इसका ब्यौरा मांगा है।


