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इस मकर संक्रांति चलो किसी महिला को एक महीने का सुकून भेंट करें : सेनेटरी नेपकीन भेंट करें

arln-admin by arln-admin
January 12, 2019
Reading Time: 1 min read
इस मकर संक्रांति चलो किसी महिला को एक महीने का सुकून भेंट करें : सेनेटरी नेपकीन भेंट करें


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लकी जैन,(ARlive news)। मां मैं इस बार छत पर पतंग उड़ाने नहीं जा सकूंगी, मैं सितोलिया खेल नहीं पाउंगी, 26 जनवरी को होने वाली स्कूल परेड में मैं हिस्सा नहीं ले पाउंगी। हर वक्त कपड़े चेक करने पड़ते हैं, मां सहेलियां मजाक बनाती है। ऐसी कई खुशियों को देश की लाखों किशोरियों और महिलाओं को इसलिए छोड़ना पड़ता है, क्यों कि वे आर्थिक रूप से इतनी मजबूत नहीं होती कि अपने मासिकधर्म के दौरान उपयोग के लिए नेपकीन पेड्स खरीद सकें।

कच्ची बस्तियों में रहने वाली अधिकतर महिलाएं-किशोरियों आज भी मासिकधर्म में पेड्स की जगह कपड़ा उपयोग करती हैं, क्यों कि वे पेड्स का खर्चा वहन नहीं कर पाती। कपड़े के उपयोग से वे न सिर्फ उन तीन दिन, बल्कि महीने भर तनाव में रहती हैं। वे पढ़ना चाहती हैं, जीवन में बहुत आगे बढना चाहती हैं, लेकिन सिर्फ इस कारण से हर मौके पर खुद को पिछड़ा हुआ महसूस करती हैं।

मकर संक्रांति पर लोग अपने आस-पास जरूरतमंद को दान के नाम पर कुछ न कुछ भेंट करते हैं, तो क्यों न हम इस बार कच्ची बस्तियों में जाकर जरूरतमंत किशोरियों और महिलाओं को पांच सेनेटरी नेपकीन पेड्स भेंट करें, ताकि वे इसे पाकर एक महीना सुख और सुकून से गुजार सकें। आपका यह दान एक या दो दिन नहीं बल्कि एक महिला या किशोरी को एक महीने का सुकून देगा।

उदयपुर में तो एक परिवार इस सोच की शुरूआत कर चुका है। माली कॉलोनी निवासी हेमलता सनाढ्य ने अपनी बहू, बेटियों के साथ मिलकर यह निर्णय लिया है कि वे इस बार मकर संक्रांति पर कच्ची बस्ती में जाकर महिला-किशोरियों को सेनेटरी नेपकीन ही भेंट करेंगी। यहां खासबात यह है कि हेमलता सनाढ्य को यह विचार किसी महिला ने नहीं बल्कि उनके पुत्र ने दिया।

अस्मिता झाला उदयपुर में जॉब करती हैं और गायत्री नगर सेक्टर पांच में रहती है। वे तो यह सुकून हर महीने किसी जरूरतमंद महिला को भेंट करती हैं। अस्मिता बताती हैं कि हर महीने सेनेटरी नेपकीन के दो पैकेट खरीदती हैं। एक खुद के लिए और एक किसी जरूरतमंत महिला के लिए जो इसे खरीद नहीं सकती लेकिन उसे इसकी जरूरत है। ऐसा करके मुझे खुद सुकून और खुशी का एहसास होता है, क्यों कि एक छोटे से प्रयास से मैं किसी महिला या किशोरी के चेहरे पर तनाव मुक्तमुस्कुराहट लाने में सफल हो रहती हूं। मेरे इस प्रयास से मेरे सहेलियां सुहानी व अन्य भी जुड़ गई हैं और अब वे भी ऐसा करती हैं।

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