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शिवसेना का मोदी सरकार से सवाल: आरक्षण तो दे दिया, लेकिन नौकरियां कहां हैं?

arln-admin by arln-admin
January 10, 2019
Reading Time: 1 min read
शिवसेना का मोदी सरकार से सवाल: आरक्षण तो दे दिया, लेकिन नौकरियां कहां हैं?


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मुंबई,(ARlive news)।  सामान्य वर्ग को मिले आरक्षण को लेकर मोदी सरकार पर एक बार फिर सहयोगी पार्टी शिवसेना ने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला किया है। सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने को संसद से मंजूरी मिलने के एक दिन बाद शिवसेना ने आश्चर्य व्यक्त किया कि नौकरियां कहां से आएंगी ? संसद से आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण का बिल पास होने के बाद एनडीए की सदस्य शिवसेना ने भाजपा पर निशाना साधा है।

शिवसेना ने कहा है कि आरक्षण तो दे दिया, लेकिन नौकरियां कहां हैं? मंजूरी मिलने के एक दिन बाद शिवसेना ने हैरानी जताई कि नौकरियां कहां से आएंगी? पार्टी ने साथ ही चेतावनी दी कि अगर यह एक चुनावी चाल है तो यह महंगा साबित होगी। शिवसेना ने कहा किमराठा समुदाय को भी महाराष्ट्र में आरक्षण दिया गया है लेकिन सवाल अभी भी यही बना हुआ है कि नौकरियां कहां है?

संसद ने सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान वाले ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के एक संपादकीय में कहा है, जब सत्ता में बैठे लोग रोजगार और गरीबी दोनों मोर्चो पर विफल होते हैं तब वे आरक्षण का कार्ड खेलते हैं। अगर यह वोट के लिए लिया गया निर्णय है तो यह महंगा साबित होगा। 10 फीसदी आरक्षण के बाद रोजगार का क्या होगा? आपको नौकरी कहां से मिलेगी? शिवसेना ने कहा भारत में, 15 साल से अधिक उम्र के लोगों की आबादी हर महीने 13 लाख बढ़ रही है।

18 वर्ष से कम आयु के नाबालिगों को नौकरी देना अपराध है लेकिन बाल श्रम लगातार जारी है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पार्टी केन्द्र और महाराष्ट्र दोनों जगह सत्तारूढ़ भाजपा की गठबंधन सहयोगी है। ‘सामना’ में कहा गया है कि देश में रोजगार की दर को संतुलित बनाए रखने के लिए हर साल 80 से 90 लाख नए रोजगारों की जरूरत है लेकिन यह गणित कुछ समय से असंतुलित है। सामना में कहा गया है, ‘पिछले दो सालों में नौकरी के अवसर बढ़ने के बजाय कम हुए हैं और नोटबंदी एवं जीएसटी लागू किये जाने के कारण करीब 1.5 करोड़ से लेकर दो करोड़ नौकरियां गई हैं। युवाओं में लाचारी की भावना है।

सोर्स : जीएनएस न्यूज एजेंसी

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