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संपादकीय : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू, सवाल तगड़े, जवाब ढीलेः डॉ. वेदप्रताप वैदिक

arln-admin by arln-admin
January 3, 2019
Reading Time: 1 min read
संपादकीय : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू, सवाल तगड़े, जवाब ढीलेः डॉ. वेदप्रताप वैदिक


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ARlive news, डॉ. वेदप्रताप वैदिक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक समाचार समिति को लंबा इंटरव्यू दिया, यह अपने आप में खबर है। जिन प्रधानमंत्री ने साढ़े चार साल में एक भी पत्रकार परिषद नहीं की, जिन्हें पत्रकारों से मुखातिब होने में डर लगता है और जो अपनी विदेश यात्राओं में उन्हें साथ ले जाने से हिचकिचाते है, उसकी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी कि उन्होंने एक महिला पत्रकार से इतनी लंबी बात की। यह बहुत ही शालीनता से हुई।

एक भी सवाल ऐसा नहीं था कि जिसे सुनकर सर्वज्ञजी बौखला उठें, लेकिन वे सब तीखे सवाल जरुर थे, जो भारत की जनता को परेशान किए हुए हैं। इन सवालों का तीखा जवाब सिर्फ एक ही था, वह था गांधी परिवार के बारे में। बाकी सब सवालों के जवाब भर्ती के थे। खाली जगह भरनेवाले। उनमें कोई दम नहीं था। वे सारे जवाब प्रचारमंत्रीजी अपने भाषणों में बराबर दोहराते रहे हैं। जैसे राम मंदिर के बारे में उन्होंने अपनी सरकार के दिमागी दिवालियापन पर मुहर लगा दी। वे अदालत का इंतजार करेंगे। याने सरकार निकम्मी है। उसके पास कोई हल नहीं है। उनसे कोई पूछे कि आपको राम मंदिर-विवाद का क ख ग भी पता है या नहीं ?

अदालत तो कुल पौने तीन एकड़ जमीन की मिल्कियत का फैसला करेगी। अयोध्या में उस जमीन पर क्या बने, कैसे बने, कहां-कहां बने और किस-किस को मनाया-पटाया जाए, इससे सर्वज्ञजी को कोई मतलब नहीं ? इस मामले में उन्हें उनका ‘मार्गदर्शक मंडल’ रास्ता बता सकता था लेकिन उसे उन्होंने ‘मार्ग देखते रहनेवाला मंडल’ बना दिया है। उन्हें पता ही नहीं प्र.म. नरसिंहराव के जमाने में यह विवाद हल के करीब पहुंच चुका था लेकिन अचानक ढांचे के ढहने से सारा मामला उलझ गया। अदालत के बाहर यह विवाद आज भी हल हो सकता है।

सर्जिकल स्ट्राइक और रफाल सौदे पर भी मोदी के जवाब बिल्कुल लचर-पचर थे। वे फौज की इज्जत की आड़ में अपना मुंह छिपाने की कोशिश करते रहे। रिजर्व बैंक, सीबीआई, नोटबंदी तथा अन्य मुद्दों पर वे अगर असली पत्रकारों के बीच होते तो वे पत्रकार-परिषद करने से हमेशा के लिए तौबा कर लेते। मोदी से ज्यादा हिम्मत तो राजीव गांधी और मनमोहनसिंह- जैसे प्रधानमंत्रियों ने दिखाई थी, जो गैर-राजनीतिक होते हुए भी पत्रकारों के सवालों का जैसे-तैसे मुकाबला करते थे। तीन हिंदी-राज्यों में पटकनी खाने के बाद थोड़ी अक्ल तो आई। यह भी क्या कम है ? मोदी ने बिल्कुल ठीक ही कहा कि 2019 में जनता मुकाबला करेगी लेकिन किसका ?

सोर्स : जीएनएस न्यूज एजेंसी

Tags: #PM Narendra modi#interview#

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