
रिज़र्व बैंक के वेबसाइट पर जारी बयान में उर्जित पटेल ने कहा है, निजी कारणों से मैंने तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया है।
पिछले कई वर्षों से भारतीय रिज़र्व बैंक में विभिन्न पदों पर रहना मेरे लिए सम्मान की बात रही है। पिछले कुछ वर्षों में रिज़र्व बैंक कर्मचारियों की कड़ी मेहनत और सहयोग बेहद अहम रहा। मैं इस मौके पर अपने सहयोगियों और रिज़र्व बैंक के डायरेक्टर्स के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ और भविष्य के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। इस बयान में जहां रिर्जव बैंक के कर्मचारियों और अधिकारियों की उन्होंने चर्चा की सराहना की वहीं सरकार के प्रति किसी तरह की उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की।
अपने इस्तीफे में न तो उन्होंने प्रधानमंत्री की चर्चा की न वित्त मंत्री की न ही सरकार और वित्त मंत्रालय के किसी अधिकारी की चर्चा की। आखिर इसका मायना क्या है? मामला साफ है उर्जित पटेल की नाराजगी सरकार के प्रति साफ दिखाई देती है। उर्जित पटेल की केंद्र से तनातनी की खबरें लंबे समय से मीडिया की सुर्खियां बनी रही। हांलाकि उन्होंने इस्तीफे के पीछे निजी कारणों को जिम्मेदार बताया है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बीच पिछले काफी समय से विवाद चल रहा था. भारत सरकार ने अगस्त 2016 में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर उर्जित पटेल को नया गवर्नर घोषित किया था।
उन्होंने रघुराम राजन की जगह ली थी। उनका कार्यकाल 3 साल का था। 28 अक्टूबर 1963 को जन्मे उर्जित ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से बीए किया है। इस बीच बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि उर्जित पटेल के इस्तीफे से शेयर बाजार में गिरावट आ सकती है।


