जोधपुर (जीएनएस)। यह कहानी है जोधपुर की बेटी दिव्या चौधरी की। वह पिता पर बोझ नहीं बनाना चाहती थी। पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी. लाडो पढ़ लिखकर सीए बन गई। इस बीच उसने परिजनों की ओर से बचपन में की सगाई का विरोध किया तो परिजन उसकी जिद के आगे मान गए, लेकिन बीच में आ गई खांप पंचायत। इस खाप पंचायत की कारगुजारियों के चलते दिव्या के परिजनों को न केवल 16 लाख का जुर्माना भरना पड़ा, बल्कि दिव्या को भी जहर खाने जैसा आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया. गनीमत रही कि दिव्या को समय पर अस्पताल ले जाया और वह बच गई।
जोधपुर के शिकारगढ़ में निवासीपूराराम चौधरी ने अपनी बेटी दिव्या की सगाई उसके बचपन में ही पाल रोड निवासी जीवराज के साथ कर दी थी। दिव्या के इनकार के बाद परिजन तो मान गए, लेकिन इस बीच खांप पंचायत ने मामले में दखल दे डाली। चार माह से दिव्या के परिवार पर खांप पंचायत तथा युवक के परिवार की ओर से शादी का दबाव बनाया जा रहा था। पंचों की ओर से 25 अक्टूबर को बनाड़ स्थित महादेव मठ में 17 खेड़ों की पंचायत बुलाई गई। इसके लिए दिव्या के घर बुलावा भेजा गया. पंचायत में दिव्या के परिवार के लोग वहां नहीं पहुंचे। बनाड़ पुलिस से शिकायत करने पर वह वहां पहुंच गई तो पंच पंचायत से भाग छूटे।
पंच तिलमिलाए तो लगाया 16 लाख रुपए का दंड
इसके बाद तिलमिलाए पंचों ने तय किया कि अब परिवार को समाज से बहिष्कार करने के साथ-साथ आर्थिक दंड दोगुना कर देंगे। 27 अक्टूबर को फिर पंचायत कर शादी से इनकार करने पर पूराराम पर 16 लाख रुपए दंड लगा दिया। दिव्या के परिजनों ने डेढ़ घंटे में ये राशि जमा करवा दी। इसके बाद भी पंचों का कहना था कि 25 अक्टूबर की पंचायत में जो पुलिस बुलाई गई, इसके लिए एक और दंड भरना पड़ेगा। पुलिस में जो मुकदमा दर्ज हुआ है उसे वापस लेना होगा। युवती ने थाने में खाया जहर
खांप पंचायत के दंड व पिता को परेशान होता देखकर लाडो फिर पुलिस के पास गई। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती देख उसने हताश होकर थाने में ही सल्फॉस की गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। इस पर उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

