
नेचर वैलफेयर एण्ड लर्नर्स ग्रुप के सदस्य वेदांग सायखेड़कर एवं कनिष्क कोठारी ने बताया कि उदयपुर शहर की झीलों एवं बाहर के जलाशयों जैसे वल्लभनगर, भटेवर, मेनार, चावंड, लोसिंग, मदार इत्यादि सभी जगह प्रवासी परिंदे आना शुरू हो गए है। इनमें अब तक हवासील (पेलिकन), शॉवलर, गडवाल, ऑस्प्रे, सींखपर (पिनटेल), वुड सैण्डपाईपर, कॉमन सैण्डपाईपर, टिकड़ी (कॉमनकूट), नीलकंठी (ब्लूथ्रोट), ब्लैक रैड स्टार्ट, पीली वैगटेल, गॉडविट, फ्लैमिंगो इत्यादि देखे जा चुके है।
नेचर वैलफेयर एण्ड लर्नर्स ग्रुप द्वारा स्थानीय सेंट ऐन्थोनीज सी.से.स्कूल में कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें प्रवासी पक्षी दिवस का महत्व एवं प्रवासी पक्षियों से संबंधित जानकारी विभिन्न ऑडियो-विजुअल माध्यम के द्वारा दी गई। इसमें विद्यालय के प्रशासक विलियम डिसूजा एवं उनके स्टाफ सदस्य अनिता चपलोत, योगिनी दक एवं अन्य सभी का सहयोग रहा।
इसी क्रम में रा.उ.मा.वि. ढावा, पंचायत-ढावा, वल्लभनगर में कार्यशाला आयोजित की गई एवं विद्यालय के बच्चों तथा ग्रामीणों के साथ सरजणा बांध क्षेत्र में पक्षी अवलोकन भी किया गया। इसमें वि़द्यालय के प्रधानाचार्य सत्यनारायण टेलर एवं समस्त स्टाफ तथा ग्रामीणों का सहयोग रहा।
इस सम्पूर्ण आयोजन में ग्रुप के सदस्य सृष्टि भार्गव, विधान द्विवेदी, मानस दीक्षित, प्रकृतिविद् देवेन्द्र मिस्त्री, वन्यजीव वैज्ञानिक डॉ. सुनिल दुबे, विश्व प्रकृति निधि के पूर्व प्रांतिय संयोजक विक्रमादित्य सिंह चौहान, विष्णु परिहार ने सहयोग दिया।


