घर में बहुओं को शर्मिंदा होते देखा तो उठाया शौचालय बनाने का बीड़ा।

लकी जैन, उदयपुर। मांझी ने गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए पहाड़ काटा था, लेकिन राजस्थान के डूंगरपुर जिले में एक शख्स ऐसा भी है, जिसने घर में शौचालय बनाने के लिए पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया। यह शख्स डूंगरपुर के पालवड़ा पंचायत लक्ष्मण सिंह डामोर हैं। आज इन्हें पालवड़ा सहित आस-पास की पंचायतों और जिले के लोग माउंटेन मैन के नाम से जानते हैं।
लक्ष्मण सिंह डामोर पालवड़ा के वर्तमान उपसरपंच भी हैं और रिटायर्ड फौजी हैं। फौज से रिटायरमेंट के बाद जब वे घर लौटे तो गांव की बहू-बेटियों को खुले में शौच के लिए जाते समय कई बार शर्मिंदा होते हुए देखा। उन्होंने अपने बेटों की शादी पढ़ी-लिखी बहुओं के साथ करवाई थी, लेकिन पत्नी, बहुएं भी सुबह टोलियों में शौच के लिए जाती थीं और कई बार शर्मिंदगी उठाती थीं। फौज से रिटायर हुए लक्ष्मण सिंह को यह सब नागवार गुजरा। उन्होंने घर में शौचालय बनवाने का निर्णय लिया। लेकिन शौचालय बनाने के लिए निर्माण सामग्री गांव तक लाना संभव नहीं था, क्यों कि गांव और मुख्य सड़क के बीच एक बड़ा पहाड़ था।
तब इस रिटायर फौजी ने इस पहाड़ को बहू-बेटियों की शान में दुश्मन की तरह माना और इसे दुश्मन की तरह उखाड़ फेंकने का बीड़ा उठाया। एक सैनिक की तरह बंदूक की जगह गेती-फावड़ा सहित अन्य साधन लेकर पहाड़ी को तोड़ना शुरू किया। यह देखकर गांव के दूसरे युवा, औरतें भी इसके साथ जुड़ गईं और दो-तीन महीनों में ही गांव के हर शख्स के सहयोग से लक्ष्मण सिंह डामोर ने पहाड़ी को काटकर एक उंचा-नीचा कच्चा रास्ता तैयार कर लिया, जिससे मवेशियों के जरिए निर्माण सामग्री गांव तक लाई जा सके। 2006 में इस गांव में पहला शौचालय बना लक्ष्मण सिंह डामोर के घर बना और तब से लोग उन्हें माउंटेन मैन कहकर पुकारने लगे।
लोगों को जागरूक करने में यूनीसेफ ने की काफी मदद
लक्ष्मण सिंह डामोर ने बताया कि गांव के हर घर में शौचालय बनवाने का अभियान बगैर यूनीसेफ के प्रतिनिधियों के पूरा नहीें हो पाता। गांव तक सामग्री लाने का रास्ता तो बन गया, लेकिन ग्रामीणों में जागरूकता का अभाव था। तब यूनीसेफ के प्रतिनिधियों ने गांव के एक-एक घर जाकर, पंचायत की बैठकें बुलाकर लोगों को जागरूक किया कि वे सरकारी धनराशि के सहयोग से घर में कम लागत, कम पानी दोहन वाला शौचालय बनाएं। धीरे-धीरे लोगों में जागरूकता बढ़ी और इन दस वर्षों में आज स्थिति यह है कि गांव के हर घर में शौचालय है। अब किसी महिला को शौच जाने के लिए शर्मिंदा नहीं होना पड़ता है।
स्कूलों की संसद में स्वच्छता पर होती है चर्चा
भुंवाली गांव में राजकीय उत्कृष्ट उच्च प्राथमिक विद्यालय मालीफला है। यहां बच्चों की एक संसद है। आठवीं की छात्रा मनीषा कुमारी प्रधानमंत्री है और अन्य छात्र, छात्राएं जल, स्वास्थ्य, षिक्षा, सांस्कृतिक मंत्री और उप मंत्री हैं। यहां हर दिन स्वच्छता पर न सिर्फ चर्चा होती है, बल्कि चेक किया जाता है कि बच्चा स्वच्छता के मानकों का ध्यान जैसे नाखून कटे होना, नहा कर स्कूल आना, हाथ अच्छे से धोना जैसे अन्य बातों का ध्यान रखे है या नहीं। यूनिसेफ के प्रतिनिधि समय समय पर स्कूल आकर बच्चों का जागरूक करते हैं और स्वच्छता की महत्ता को आसान उदाहरणों के साथ समझाते हैं।




