
चंडोल ने कोर्ट को बताया कि 2010 में वह सीबीआई की एसआईटी में इंस्पेक्टर था। अधिकारियों ने उसे सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के अनुसंधान टीम में रखा, तब सीबीआई एसपी अमिताभ ठाकुर केस में मुख्य अनुसंधान अधिकारी थे। 2011 में मुझे तुलसी एनकाउंटर केस के अनुसंधान टीम में भी शामिल किया गया, तब चीफ आईओ सीबीआई एडिएसपी विनय कुमार थे, बाद में इनका तबादला हुआ तो चीफ आईओ एसपी संदीप तामकड़े थे।
तफतीष के दौरान मैंने भीलवाड़ा के कोमल झा, चंदन झा, शंकर सिंह, मजीद मोहम्मद, फिरोज खान, अशोक भटनागर, कांतिलाल मीणा, कृष्णा त्रिपाठी, तुलसी के भाई पवन, भांजे कुंदन, विमल, वकील सलीम खान, सुषील कुमार, तत्कालीन इंस्पेक्टर रणविजय सिंह और जसवंत सिंह के बयान लिए थे। इनमें कृष्णा, कांतिलाल, मजीद, सुशील, अशोक और फिरोज होस्टाइल हो चुके हैं।
इसके अतिरिक्त मैंने भीलवाड़ा के प्रतापनगर थाने और उदयपुर के सूरजपोल, हिरणमगरी और डबोक थाने के रोजनामचे, वकील सलीम खान से तुलसी द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्रों की प्रति, पवन प्रजापति से तुलसी द्वारा एनएचआरसी को भेजे गए लेटर की प्रति बरामद की थी। इसके अलावा तुलसी जिस रेल से भागा था, उसके गार्ड डायरी और सेंट्रल जेल से तुलसी से संबंधित दस्तावेज, हामिदलाल हत्याकांड की फाइल और अंबामाता थाने से स्कूटर चोरी मामले की फाइल जब्त की थी। सभी दस्तावेज सीआईओ को सौंप दिए थे।
क्रॉस में बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर चंडोल ने बताया कि विमल, कुंदन को एनडीपीएस के जिस मुकदमें में गिरफ्तार किया गया था, उससे संबंधित या जिन थानों के रोजनामचे लिए थे, उनके पुलिस अधिकारी के मैंने कभी बयान नहीं लिए। न ही किसी आरोपी से मामले से संबंधित कोई रिकवरी हुई है। चीफ आईओ ने मेरे कभी कोई बयान नहीं लिए। जेल में तुलसी से मुलाकात करने वालों से संबंधित कोई दस्तावेज या सीसीटीवी फुटेज भी मैंने कभी नहीं लिए और न ही इस संबंध में कोई पड़ताल की।


