वाइरस की चेपट में हैं शेर

पहले तो सरकार शेरों की मौत को आपसी संघर्ष की कहानी बताकर नकारती रही, बाद में जांच से पत्ता चला की ये शेर कोई वाइरस का शिकार हो गये है। शेरों की मौत का आंकड़ा बढ़ा तो वहां के प्रबंधन और सरकार ने स्वीकार किया कि शेर किसी वाइरस की चपेट में हैं और संक्रामक बीमारी से इनकी मौत हो रही है। गीर प्रबंधन का कहना है कि शेरों के उपचार के लिए अमेरिका से दवाई मंगवाई जाएगी।
समूचे विश्व में एशियाई शेरों की एक मात्र प्रजाति भारत में और भारत के गुजरात के गीर अभयारण्य में है। यहां इतने शेरों का एक-एक कर मरना बेहद चिंताजनक है। सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो ऐसा न हो कि यह प्रजाति ही भारत से खत्म होने की कगार पर पहुंच जाए।
गुजरात के गीर अभयारण्य में सदियों से यह शेर रह रहे है। जिन्हें देखने के लिए दुनियाभर के लोग ,विशेश्ज्ञ आदि गुजरात आते है। पर्यटन नक़्शे में गीर अभयारण्य सिरमोर समान है। यह शेर गुजरात की अनूठी पहचान के साथ भारत की आन बान और शान भी है।
पर्यटन के लालच में दूसरे राज्य में कुछ शेरों को बसाने के लिए तैयार नहीं सरकार
वाइल्ड लाइफ के एक्सपर्ट को का कहना है की इस प्रकार से एक ही क्षेत्र में ऐसी एक मात्र प्रजाति रहने से यदि वे किसी संक्रामक रोग का शिकार हो गये तो सभी खत्म हो सकते है। ऐसे कई उदाहरण मौजूद है जिस में पूरी जाति प्रजाति खतम हो गई हो।
इसे देखते हुये एक्सपर्ट्स का कहना है की गुजरात के इन शेरों में से 50 या 100 शेर किसी अन्य राज्य में बसाने चाहिए। मध्यप्रदेश सरकार की मांग बरसों से है कि कुछ एशियाई शेर उन्हें दे दिए जाय, वे इन्हें कान्हा के जंगलों में बसाएंगे। लेकिन गुजरात सरकार इसके लिए तैयार नहीं। तर्क ये है की यदि मध्यप्रदेश को एशियाई शेर दे देंगे तो उन्हें देखने के लिए गुजरात में कौन आयेंगे…? इन शेरों को देखने के लिए गजरात आनेवाले पर्यटकों में कमी आयेंगी और पर्यटक मध्यप्रदेश जायेंगे।


