सोलंकी ने बताया खुद की जान को खतरा।
लकी जैन (संवाददाता)। सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर में केस में शुक्रवार को मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में गुजरात सीआईडी के पुलिस निरीक्षक रहे वीएल सोलंकी के बयान होने थे। वे तो कोर्ट नहीं पहुंचे, लेकिन उन्होंने समन तामील के जवाब में एक लेटर सीबीआई के जरिए कोर्ट भेजा है। सीबीआई के स्पेशल पब्लिक प्रोसीक्यूटर बीपी राजू ने कोर्ट को बताया कि सोलंकी ने खुद की जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है और कहा है कि वे बिना सुरक्षा के नहीं आएंगे।
जानकारी के अनुसार सोलंकी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2009 से 24 घंटे सुरक्षा उपलब्ध करवाई जा रही थी, हर वक्त दो कांस्टेबल उनकी सुरक्षा में साथ रहते थे, लेकिन जुलाई में यह सुरक्षा अचानक हटा दी गई। ‘the wire‘ को दिए इंटरव्यू में तो सोलंकी ने दिसंबर 2014 को नागपुर में जज बीएच लोया की अचानक हुई मौत का जिक्र करते हुए कहा कि लोया की सुरक्षा भी मौत से कुछ समय पहले ही हटाई गई थी। जब एक जज की मौत हो सकती है तो मैं तो एक सेवानिवृत इंस्पेक्टर ही हूं। मेरी जान को खतरा है और सरकार ने बिना किसी कारण के मेरी सुरक्षा हटा दी है। सोलंकी ने संकेत दिए हैं कि न सिर्फ पुलिस विभाग बल्कि सत्तारूढ़ पार्टी का उन पर काफी दबाव है। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें दोबारा सुरक्षा नहीं मिल जाती, वे बयान देने नहीं आ सकेंगे। सोलंकी विभाग से इसी जुलाई को सेवानिवृत हुए हैं।
सोलंकी के लिए ही बचाव पक्ष की ओर से कोर्ट आए थे प्रख्यात वकील जेठमलानी
अनुसंधान अधिकारियों के बयान शुरू होने के साथ ही कोर्ट ने सबसे पहले वीएल सोलंकी की 5 सितंबर तारीख पेशी दी थी। लेकिन तब भी सोलंकी बयान देने नहीं पहुंचे थे। तब सीबीआई ने कोर्ट में यह बताया था कि वे सोलंकी का समन तामील नहीं करा सके हैं। सोलंकी की 5 सितंबर की तारीख पर प्रख्यात वकील महेश जेठमलानी आरोपी एवं सोहराबुद्दीन प्रकरण के पहले अनुसंधान अधिकारी गुजरात के तत्कालीन एटीएस अधिकारी एमएल परमार की ओर से कोर्ट आए थे और अगली पेशी ली थी। हालां कि सुरक्षा नहीं होने पर सोलंकी शुक्रवार को भी तारीख पर कोर्ट नहीं पहुंचे और कोर्ट से निवेदन किया है कि उन्हें सुरक्षा उपलब्ध करवाई जाए। ऐसे में कोर्ट ने उन्हें सुरक्षा उपलब्ध करवाने के आदेश जारी कर 5 अक्टूबर को उन्हें अगली तारीख दी है।
मामले के अनुसंधान में वीएल सोलंकी की रही थी मुख्य भूमिका
मामले के अनुसंधान में वीएल सोलंकी की मुख्य भूमिका रही है। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर की वीएल सोलंकी ने सीआईडी की तत्कालीन आईजी गीता जौहरी के निर्देशन में प्रारंभिक जांच की थी। प्रारंभिक जांच में ही सोलंकी ने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के फर्जी मुठभेड़ में मार दिए जाने के संकेत दिए थे। सोलंकी की इसी रिपोर्ट के आधार पर इस केस का अनुसंधान हुआ था, जिसकी जांच आईजी गीता जौहरी के निर्देशन में सीआईडी के डीएसपी गंभीर सिंह पडेरिया को सौंपी गई थी। इसके बाद ही एनकाउंटर में शामिल आईपीएस डीजी बंजारा, राजकुमार पांडियन और दिनेश एमएन सहित अन्य को गिरफ्तार किया गया था। सीआईडी की इसी जांच रिपोर्ट को आधार बनाते हुए 2011 में सीबीआई ने सोहराबुद्दीन, तुलसी एनकाउंटर केस का अनुसंधान किया था।
सोलंकी के बयान पर ही गीता जौहरी बनीं थी आरोपी
सीबीआई को अनुसंधान ट्रांसफर होने के बाद वीएल सोलंकी के बयानों के आधार पर ही गीता जौहरी को आरोपी बनाया गया था। गौरतलब है कि सोलंकी ने गीता जौहरी से दिसंबर 2006 में उदयपुर जेल जाकर तुलसी व सिलवेस्टर से पूछताछ करने की स्वीकृति मांगी थी। लेकिन गीता जौहरी ने तब यह कहकर स्वीकृति देने से इनकार कर दिया था कि अभी इसकी आवश्यकता नहीं है और इसके करीब एक सप्ताह बाद ही अहमदाबाद पर पेशी से उदयपुर लौटते समय तुलसी का भी एनकाउंटर हो गया था। सीबीआई ने इसमें न सिर्फ गीता जौहरी को बल्कि तत्कालीन गृहमंत्री बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, तत्कालीन डीजीपी पीपी पांडे और सीआईडी के एडीजी रहे ओपी माथुर सहित कई लोगों को आरोपी बनाया था।



