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सोहराबुद्दिन-तुलसी एनकाउंटर : चीफ आई.ओ. ने कहा सोहराबुद्दिन एनकाउंटर ही नहीं, एफआईआर तक फर्जी है

arln-admin by arln-admin
September 19, 2018
Reading Time: 1 min read
सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : 12 सालों में 11 मुख्य गवाह, पुलिस अधिकारी, जेलर, जज की हो चुकी है मौत….


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सबसे महत्वपूर्ण आईओ के हुए बयान।

सोहराबुद्दिन-तुसली एनकाउन्टर केस में बुद्धवार को मुम्बई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में मुख्य अनुसंधान अधिकारी (सी.आई.ओ.) सीआईडी के सेवानिवृत्त डीएसपी गंभीर सिंह पडेरिया के बयान हुए। पडेरिया ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने सोहराबुद्दिन एनकाउंटर केस का अनुसंधान किया था। अनुसंधान में पाया था कि यह एनकाउन्टर ही नहीं, इसकी तो एफआईआर तक फर्जी थी।

प्रारंभिक जांच के आधार पर की अग्रिम जांच

पडेरिया ने कोर्ट को बताया कि वे 2007 में गुजरात सीआईडी डीएसपी थे। सोहराबुद्दिन एनकाउन्टर केस की प्रारंभिक जांच के बाद 28 मार्च 2007 को उन्हें इसकी जांच सौंपी गई थी। उनके साथ सीआईडी के 4 इंस्पेक्टर एचआर बलूच, ओबी शर्मा, एएस शुक्ला और एमबी जोशी को भी लगाया था। उस समय डीआईजी रजनीश रॉय सुपरवाइजर अधिकारी थे। हालांकि कि 2 महीने बाद हमने 3 मई 2007 से मामले का अनुसंधान सीआईडी डीआईजी गीता जोहरी के निर्देशन में किया था। जब मुझे अनुसंधान सौंप गया, तब मुझे आईजी गीता जौहरी के निर्देशन में हुई प्रारम्भिक जांच की रिपोर्ट भी दी गयी थी। हमने इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर अपनी अग्रिम जांच शुरू की थी और इसी अनुसार टीमें अलग अलग स्थानों पर गयी थी अनुसंधान के दौरान मैंने मेरे अधीनस्थ चारों इंस्पेक्टर्स के साथ टीम बनाई। मैं और बलोच हैदराबाद गए, शुक्ला और जोशी सोहराबुद्दिन के गांव झिरनिया, ओबी शर्मा और अन्य स्टाफ सांगली गए।

पडेरिया ने कोर्ट को बताया कि अनुसंधान में मैंने हैदराबाद आईपीएस ई राधा कृष्णन के बयान लिए थे, जिन्होंने राजकुमार पांडियन के हैदराबाद आने की पुष्टि की थी। इनके अलावा मैंने उस बस के ड्राइवर, क्लीनर, मालिक सहित अन्य संबंधित लोगों के बयान लिए थे जिया बस से सोहराबुद्दिन-कौसरबी हैदराबाद से सांगली के लिए बैठे थे। इनके अलावा मैंने क्वालिस गाड़ी के ड्राइवर, फार्म हाउस के मालिक जहां दोनों को रखा गया था, डीजी बंजारा के गांव इलोल के क्रेन ऑपरेटर, टाटा 407 के ड्राइवर जिसमे लकड़ीया लायी गयी थी और दिनेश एमएन के ड्राइवर पुरण मल मीणा के बयान लिए थे। गौरतलब है कि ई.राधा कृष्णन के अलावा मामले में कोर्ट में हुए बयान में सभी होस्टाइल हो चुके है। इसके अलावा भी पडेरिया ने 15 अन्य लोगों के बयान लिए थे, लेकिन सीबीआई ने उनको एविडेंस के लिए नहीं बुलाया है।

पंचनामे एग्जीबिट हुए

पडेरिया ने कोर्ट में वे सभी पंचनामा और दस्तावेज भी एग्जीबिट किये जो उसने सोहराबुद्दिन-कौसरबी बी के अपहरण स्पॉट जहाना बाद, एनकाउन्टर स्पॉट, दिशा और अर्हम फार्म हाउस, इलोल गांव जहां कौसरबी को जलाया था, वह स्पॉट पर तैयार किये थे। मौके से ली मिट्टी की सैंपल रिपोर्ट और हथियारों की रिपोर्ट जो एनकाउन्टर में उपयोग हुए थे, सभी रिपोर्ट और दस्तावेज कोर्ट में पडेरिया ने पेश किए।

स्पॉट से नहीं मिले साइंटिफिक एविडेंस

बचाव पक्ष के वकील वहाव खान के पूछने पर पडेरिया ने कोर्ट को बताया कि उसे किसी भी स्पॉट से कोई साइंटिफिक एविडेंस नहीं मिले थे। हथियार आरोपियों से या उनकी सूचना पर जब्त नहीं किये थे। बल्कि राजस्थान पुलिस के हथियार को पुलिस लाइन के एसआई फतह सिंह ने लाकर पेश किए थे। मैंने हथियारों पर न तो कभी फिंगर प्रिंट चेक करवाए और न ही ये पता किया कि ये हथियार आखिरी बार कब उपयोग में लिए गए थे। मुझे एनकाउंटर स्पॉट भी किसी आरोपी ने नहीं दिखाया था। मैंने उस कार की भी कोई तफ्तीश नहीं की थी जिससे सोहराबुद्दिन हैदराबाद गया था, वह कार कहाँ है मैं यह भी नहीं जानता हूं। 

पडेरिया ने कोर्ट को बताया कि मामले की एफआईआर अब्दुल रहमान ने दी थी या किसी और ने मुझे इस बात की भी जानकारी नहीं है। एफआईआर गुजराती में टाइप थी, अब्दुल रहमान को गुजराती आती थी या नहीं, मैंने यह भी पता नहीं किया था। 

जिनकी गिरफ्तारी की अनुमति मांगी, उन्हें गवाह क्यों बनाया पता नहीं

7 मई 2007 को मैंने आईजी गीता जौहरी को एक पत्र लिखकर 13 आरोपियों की गिरफ्तारी की अनुमति मांगी थी। इसमें नाथू बा जडेजा, गुरुदयाल, भाईलाल और वीए राठौड़ के नाम भी थे। लेकिन बाद में सीआईडी ने इन चारों को ही चार्जशीट में गवाह बना लिया था। यहाँ तक कि इंपेक्टर वीएल सोलंकी ने गुरुदयाल के सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट में बयान तक करवा दिए थे।

गौरतलब है कि इन चारों गवाहों में से वीए राठौड़ को गुजरात हाईकोर्ट ने डीजी बंजारा की याचिका पर आरोपी बनाया था। इसके बाद वीए राठौड़ को इसमे गिरफ्तार किया गया था।

पडेरिया ने कोर्ट को बताया कि स्वास्थ्य खराब होने से मैंने अनुसन्धान पूरा कर समस्त पत्रावली 4 जुलाई 2007 को अधिकारियों को सौंप दी थी। जिसके आधार पर जुलाई में ही सीआईडी अधिकारी एचआर हड़िया ने कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी थी। मैंने जिनकी गिरफ्तारी की अनुमति मांगी थी, सीआईडी ने उन चारों को गवाह क्यों बनाया था, मुझे इसकी जानकारी नहीं है।

गौरतलब है कि पडेरिया की 7 मई 2005 को गीता जौहरी को लिखे गए पत्र से पहले ही अनुसंधान में आरोपी पाए जाने पर सीआईडी 24 अप्रैल 2007 को मामले में तीनों आईपीएस डीजी बंजारा, राज कुमार पांडियन और दिनेश एमएन को गिरफ्तार कर चुकी थी। इसके बाद इनकी टीम के एनएच डाबी, संतराम, अजय परमार, अब्दुल रहमान, हिमांशु, श्याम सिंह, बीके चौबे, एन वी चौहान और नरेंद्र अमीन को गिरफ्तार किया गया था।

पांडियन के हस्ताक्षर लेने वाले आईओ बलोच के भी हुए बयान

पडेरिया के बाद इनकी टीम का हिस्सा रहे एच आर बलोच के भी बयान हुए। इन्होंने कोर्ट को बताया कि इन्होंने हैदराबाद में कुछ मोबाइल नंबरो की जानकारी ली थी। इसके अलावा इंटरनेशनल फ्लाइट में हुए हस्ताक्षर से मिलान करने के लिए राजकुमार पांडियन के  हस्ताक्षर लिए थे। हालांकि मिलान रिपोर्ट में क्या आया, ये मुझे नहीं पता।

Tags: आईओतुलसी एनकाउंटरबयानसोहराबुद्दिन एनकाउन्टर

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