मैंने कभी नहीं कहा कि अभय चूडाश्मा ने मुझे धमकाया था।
सीबीआई ने तुलसी एनकाउंटर को सोहराबुद्दीन केस से जोड़कर इस केस को खराब किया है।

नयाबुद्दीन ने कोर्ट को बताया कि सीबीआई अनुसंधान अधिकारी डागर ने मेरे बयानों में झूठ लिखा था कि अभय चूडाश्मा ने मुझे अमित शाह के नाम से धमकाया था और आजम के जरिए मुझे 50 लाख रुपए का लालच देकर सुप्रीम कोर्ट से एप्लीकेशन वापस लेने का दबाव बनाया था। ये बातें सीबीआई ने मेरे बयानों में झूठी लिखी थीं। मैं आजम को न तो जानता हूं और न ही उससे कभी मिला हूं। सीबीआई लीपापोती में मास्टर है, मुझे सीबीआई पर बिलकुल भरोसा नहीं है। मेरे ये गलत बयान जब सामने आने तो मैंने गुजरात कोर्ट में इस संबंध में एफीडेविट भी लगाया था। सोमवार को नयाबुद्दीन ने उस एफीडेविट कोर्ट में पेश किया, जो एग्जीबिट हुआ।
सोहराबुद्दीन के साथ कौसरबी थी, तुलसी नहीं था
नयाबुद्दीन ने कोर्ट को बताया कि 16-17 नवंबर 2005 तक सोहराबुद्दीन और कौसरबी गांव झिरनिया थे। सोहराबुद्दीन कुछ दिनों पहले हैदराबाद से कलीमुद्दीन की ओमनी वैन लेकर आया था और यह वेन उसके दोस्त डॉ. प्रकाश के एमपी के मस्की स्थित घर पर खड़ी थी। डॉ. प्रकाश वह वेन लेकर इंदौर आए थे और 17 नवंबर को सोहराबुद्दीन-कौसरबी दोनों उस वेन से इंदौर से हैदराबाद के लिए गए थे। 22 नवंबर 2005 को सोहराबुद्दीन ने मुझे फोन कर बताया था कि वे एमजे टूर एंड ट्रेवल्स बस से हैदराबाद से सांगली डॉ. प्रकाश के दोस्त के पास इलाज के लिए जा रहे हैं। इंदौर से हैदराबाद जाते समय और लौटते समय उनके साथ तुलसी नहीं था। सीबीआई ने तुलसी को इस केस से जबरन जोड़ा है।
एटीएस गुजरात ने सौंपा था सोहराबुद्दीन का शव
नयाबुद्दीन ने कोर्ट को बताया कि सोहराबुद्दीन-कौसरबी दोनों सांगली नहीं पहुंचे। मैंने डॉ. प्रकाश और आपा(कलीमुद्दीन की बहन) को फोन किया, लेकिन सोहराब-कौसरबी का कुछ पता नहीं चला। बाद में अखबार से पता चला कि सोहराबुद्दीन गुजरात में 26 नवंबर 2005 को मार दिया गया है। गुजरात एटीएस के अधिकारी देसाई से बात हुई। उन्होंने बताया कि सोहराबुद्दीन को मार दिया गया है, शव लेने आ जाओ। परिवार में भाई रूवाबुद्दीन और अन्य लोग शव लेने गए। एटीएस के अधिकारी परमार ने शव परिजनों के सुपुर्द किया था। रूवाबुद्दीन ने कौसरबी के बारे में परमार से पूछा तो उन्होंने बताया था कि उसका कोई पता नहीं चला है। सीबीआई अधिकारी डागर ने जांच के दौरान मुझे बताया था कि डॉ. अमीन ने कौसरबी को जहर का इंजेक्शन देकर मार दिया था।
कलीमुद्दीन ने बताया था कि गुजरात पुलिस ने दोनों का अपहरण किया था
नयाबुद्दीन ने कोर्ट को बताया कि सोहराबुद्दीन की मौत के कुछ दिनों बाद कलीमुद्दीन ने मुझे बताया था कि गुजरात पुलिस ने जहानाबाद के पास से सोहराबुद्दीन और कौसरबी को बस से उतारा था और एक क्वालिस गाड़ी और टाटा सूमो गाड़ी में अपहरण कर ले गई थी। इसके बाद सोहराबुद्दीन को फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया था। मुझे नहीं पता कि मेरे भाई का एनकाउंटर क्यों किया गया। सोहराबुद्दीन की मौत के एक महीने बाद 26 दिसंबर 2005 को मेरी मां ने सुप्रीम कोर्ट में एप्लीकेशन लगाकर मामले की जांच की मांग की थी।


