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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : आईओ ने क्यों नहीं निकाली गाड़ी की डिटेल, जिससे सोहराबुद्दीन हैदराबाद गया था

arln-admin by arln-admin
September 12, 2018
Reading Time: 1 min read
सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर : 12 सालों में 11 मुख्य गवाह, पुलिस अधिकारी, जेलर, जज की हो चुकी है मौत….


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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में बुधवार को मुंबई में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में मामले में अनुसंधान अधिकारी रहे दो आईओ एडी मौरे और एसएस गिरी के बयान हुए। एडी मौरे ने मामले में आठ लोगों के बयान लिए थे, इनमें से एक डाॅ प्रकाश बांदेवेड़ेकर को छोड़कर सभी होस्टाइल हो चुके हैं। वहीं एसएस गिरी ने 20 बयान लिए थे, इनमें से कोर्ट में 9 बयान ही हुए और इनमें 7 होस्टाइल हुए हैं।

प्रकाश के ट्रायल के दौरान हुए कोर्ट में हुए बयान के आधार पर बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर एडी मौरे से कोर्ट को बताया कि हां यह सही है कि प्रकाश ने जिस ओमनी गाड़ी का जिक्र किया था कि सोहराबुद्दीन, कौसरबी और तुलसी के साथ जिस गाड़ी से हैदराबाद गए थे, उस गाड़ी की जानकारी निकालने का मुझे विचार भी नहीं आया। इस पर बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि यह गवाह आपने अपनी कहानी को स्थापित करने के लिए अधिकारियों के कहने से इंप्लांट किया था, इसलिए आपको पता था कि प्रकाश ने सोहराबुद्दीन को ऐसी कोई गाड़ी नहीं दी थी, जिससे वह हैदराबाद गया था और इसीलिए इस गाड़ी की जानकारी निकालने का आपको ध्यान में भी नहीं आया।

यहां उस ओमनी गाड़ी का जिक्र हो रहा है, जिसके लिए प्रकाश ने बयान दिए थे कि सोहराबुद्दीन की एक ओमनी गाड़ी अक्सर मेरे पास रहती थी। मैंने यह गाड़ी सोहराबुद्दीन को लाकर दी थी और सोहराबुद्दीन मेरे और सोहराब के भाई नियाबुद्दीन के सामने इस गाड़ी से कौसरबी और तुलसी के साथ हैदराबाद के लिए रवाना हुआ था।

सीबीआई ने गवाह के बयान तो लिए, लेकिन उसके बारे में कोई जानकारी नहीं जुटाई

कोर्ट में बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर सीबीआई के इंस्पेक्टर रहे एडी मौरे ने बताया कि यह सही है कि मैंने सीबीआई के चीफ आईओ अमिताभ ठाकुर के कहने पर इन लोगों के बयान लिए थे। मैं सोहराबुद्दीन या कौसरबी को निजी तौर पर नहीं जानता था और न ही कभी इनके फोटो देखे थे। सोहराबुद्दीन का दोस्त डाॅ प्रकाष को मैं जेल जाकर मिला था। मैं वहां उससे दो-तीन बार मिलने गया था। वह हत्या के मामले में बंद था, लेकिन उस पर हत्या के कितने मामलों के चार्ज थे, यह जानकारी मुझे नहीं थी और न ही यह पता था कि उसके भाई का भी एनकाउंटर हो चुका था और वह किसी गैंग से जुड़ा था। मैंने इस बात की जानकारी भी नहीं जुटाई थी कि प्रकाश वास्तविक में डाॅक्टर था, या उसके पास कोई मेडिकल पढाई की डिग्री थी, या उसने खुद अपने आप को डाॅक्टर प्रचारित किया हुआ था। यह भी सही है कि सीआईडी क्राइम ब्रांच गुजरात की तफतीश के दौरान लिए गए प्रकाश के सीआरपीसी की धारा 161 के बयान दिखाकर ही मैंने प्रकाश के 164 के तहत कोर्ट में बयान करवाए थे।

मुझे नहीं पता कि कौसरबी सोहराबुद्दीन की पत्नी थी या नहीं

कोर्ट में बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर इंस्पेक्टर एडी मौरे ने कोर्ट को बताया कि यह सही है कि मुझे नहीं पता कि कौसरबी सोहराबुद्दीन की पत्नी थी या नहीं। कौसरबी का पति कौन था, उसके उससे कितने बच्चे थे मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी और न ही मैंने इस संबंध में डाॅ. प्रकाश के जरिए कोई अनुसंधान किया था। इंस्पेक्टर मौरे ने बताया कि जब प्रकाश के बयान लिए थे, उसने मुझे बताया था कि जब सोहबराबुद्दीन हैदराबाद पहुंचा था, तो मुझसे फोन पर बात की थी। हालां कि मैंने प्रकाष के फोन की कोई डिटेल, सीडीआर या मोबाइल कलेक्ट नहीं किया।

अंग्रेजी में बयान इसलिए लिखे कि गवाह पढ़ न सकें

कोर्ट में बचाव पक्ष के वकील ने मौरे से पूछा कि शरद, अमित, अंजली और मंजुषा आपटे और डाॅक्टर प्रकाश के बयान उन्होंने मराठी में दिए थे और आप भी मराठी जानते हैं तो आपने बयान अंग्रेजी में क्यों लिखे। इस सवाल का मौरे के पास कोई जवाब नहीं था और उसने कोर्ट को बताया कि कोई कारण नहीं था कि बयान मराठी में नहीं लिखकर अंग्रेजी में लिखे गए। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि आपने ने ऐसा इसलिए किया था कि आपने बयान में वह नहीं लिखा था जो गवाह ने मराठी में बोला था, बल्कि अंग्रेजी में वह बयान लिखे थे, जो आपके अधिकारियों ने आपको निर्देषित किए थे। इस पर मौरे से कहा यह सत्य नहीं हैं।

हैदराबाद से संबंधित लोगों के लिए थे गिरी ने बयान

सीबीआई चार्जशीट की कहानी के अनुसार सीबीआई अधिकारी रहे एसएस गिरी से सोहराबुद्दीन की हैदराबाद यात्रा और हैदराबाद गए एटीएस अधिकारी पांडियन व उनकी टीम से संबंधित 20 लोगों के बयान लिए थे इनमें 9 के बयान ही ट्रायल कोर्ट में हुए हैं और इनमें भी 7 होस्टाइल हुए हैं। इन सात में मिस्पा हैदर उस बस का ड्राइवर था, जिससे सोहराबुद्दीन, कौसरबी और तुलसी के साथ हैदराबाद से सांगली के लिए रवाना हुआ था। गजीउद्दीन बस का क्लीनर, मोहम्मद नईमुद्दीन बस बुकिंग क्लर्क था।

इसके अलावा गोला विक्रम वेंकट सुमन बाबू आईडिया कंपनी का एजेंट, बाला शंकरा बाबू टांसपोर्ट कंपनी का मालिक था। सीबीआई कहानी के मुताबित शंकरा बाबू के नाम पर जारी हुई आईडिया कंपनी की एक सिम आंध्रा पुलिस निरीक्षक श्रीनिवास राव काम में ले रहा था। इसके अलावा गिरी ने नयाबुद्दीन जिसके घर सोहराबुद्दीन गया था, उसकी बहन सलीमा बेगम के बयान भी लिए थे। इसके अलावा एसएस गिरी ने सीआरपीएफ मैस से संबंधित रिकाॅर्ड जब्त किया था, जिसमें टेलीफोन मैसेज रजिस्टर, गेस्ट रजिस्टर, अकोमोडेशन रजिस्टर, सीआरपीसी ग्रुप सेंटर के गेट नंबर तीन का ड्यूटी रजिस्टर और इन-आउट व्हीकल रजिस्टर शामिल थे।

बचाव पक्ष के वकील ने गिरी से कहा कि आपने अधिकारियों के कहने पर गलत तथ्यों के आधार पर अपनी मर्जी से बयान लिखे थे और फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। इस पर गिरी ने कहा कि यह सही नहीं है।

Tags: sohrabuddin encountertulsi encounter

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