केरल में बाढ़ राहत अभियान के तहत विदेशों ने वित्तीय सहायता का दिया था प्रस्ताव।
सरकार का फैसला घरेलू उपायों से ही निपटें इस त्रासद बाढ़ से।
थाईलैंड के राजदूत चुटिंटॉर्न सैम गोंगसाकडी ने मंगलवार को ट्वीट में अफसोस के साथ अनौपचारिक रूप से स्वीकार किया कि बाढ़ प्रभावित केरल के लिए भारत सरकार विदेशी चंदे को स्वीकार नहीं कर रहा है । भारत के लोग, हम दिल से आपके साथ हैं।
इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान ने भी केरल बाढ़ राहत के रूप में 700 करोड़ की वित्तीय सहायता की मदद की पेशकश की थी। करीब 30 लाख भारतीय संयुक्त अरब अमीरात में रहते और काम करते हैं, जिनमें से 80 फीसदी केरल के हैं।
मालदीव ने केरल के बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए 35 लाख रुपये दान देने का फैसला किया है । संयुक्त राष्ट्र भी केरल के लिए कुछ मदद की पेशकश दे रहा है।
सूत्रों ने अनुसार भारत के सहायता स्वीकार करने की संभावना नहीं है। सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए केवल घरेलू प्रयासों पर निर्भर रहने का फैसला किया है, और केंद्र ने माञ 600 करोड़ रुपये की सहायता दी है ।
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने मोदी सरकार की सहायता पेशकश को निराशाजनक बताया है।
गौरतलब है कि केरल में सदी की सबसे विनाशकारी बाढ़ में 300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 10 लाख से अधिक लोग बेघर हो गए।

