
सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में सोमवार को मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में तुलसी प्रजापति के भांजे कुंदन के दोस्त विमल के बयान हुए। विमल ने कोर्ट को बताया कि 2006 से 07 के बीच वह उदयपुर सेंट्रल जेल में बंद था। यहां वह दोस्त के मामा तुलसी से मिला था। उन्होंने जेल में बताया था कि वे साेहराबुद्दीन केस के गवाह हैं, उसका फर्जी एनकाउंटर हुआ था, अब उनकी जान को खतरा है।
गवाह विमल को पुलिस गार्ड के साथ इंदौर सेंट्रल जेल से मुंबई कोर्ट लाया गया। इंदौर में वह करीब डेढ़ महीने से जेल में हैं। उसने मुंबई कोर्ट को बयान देते हुए बताया कि 2006-07 में वह उदयपुर सेंट्रल जेल बंद रहा था। इससे पहले मेरे दोस्त कुंदन के मामा उदयपुर सेंट्रल जेल में थे। मैं कुंदन के साथ उसके मामा से मिलने सेंट्रल जेल गया था। वहां उन्होंने हमें शाम को रेलवे स्टेशन बुलाया था और अहमदाबाद कोर्ट पेशी पर ट्रेन में साथ चलने को कहा था। हम उसी दिन शाम को रेलवे स्टेशन पहुंचे थे, वहां तुलसी ने बताया था कि उसकी जान को खतरा है।
विमल ने कोर्ट को आगे बताया कि हम ट्रेन में चढ़ते इससे पहले सूरजपोल पुलिस ने हमें पकड़ लिया। पुलिस मुझे और कुंदन को अलग-अलग थानों में लेकर गई और कुछ दिन अवैध हिरासत में रखने के बाद सलूंबर में एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार किया था। इसके बाद हम उदयपुर सेंट्रल जेल डेढ़ साल बंद रहे थे। हमें बैरक नंबर 15 में रखा गया था, तुलसी बैरक नंबर 14 में था। तुलसी ने हमें बताया था कि सोहराबुद्दीन का फर्जी एनकाउंटर किया है, वह उसका गवाह हूं। ऐसे में उसकी जान को खतरा है। हम जेल में ही थे, तब हमें तुलसी का एनकाउंटर होने का पता चला था। इसके आठ-नौ महीने बाद हमारी भी जमानत हो गई थी।
भावसार ने कहा स्कूटर तो मिला था, लेकिन नंबर प्लेट नहीं थी
दूसरे गवाह उदयपुर के ओम प्रकाश भावसार के हुए। ये उस चोरी स्कूटर के मालिक हैं, जिसकी नंबर प्लेट बरामदगी के लिए पुलिस ने आजम को प्रोडक्शन वारंट से गिरफ्तार किया था और पेशी पर तुलसी अकेला गया था। भावसार ने कोर्ट को बताया कि फरवरी 2004 में मेरा महाकालेश्वर मंदिर से स्कूटर चोरी हुआ था। अंबामाता थाने में चोरी का मामला दर्ज करवाया था।
दो महीने बाद पुलिस ने आरोपियों से स्कूटर बरामद किया था। थाने से मिली सूचना के बाद मैंने कोर्ट से एप्लीकेशन लगा स्कूटर प्राप्त किया था। सरकारी वकील के पूछने पर भावसार ने बताया कि जब थाने से स्कूटर प्राप्त किया था, तब उस पर काफी धूल जमीं थी और उस पर नंबर प्लेट नहीं थी।


