जानकारी के अनुसार आईपीएस दिनेश एमएन, गुजरात आईपीएस डीजी बंजारा, राजकुमार पंड्यन, गुजरात डीएसपी नरेन्द्र अमीन और कांस्टेबल दलपत सिंह को सेशन कोर्ट ने 2016 से 2017 के बीच अलग-अलग तारीखों में बरी करने के आदेश दिए थे। इस पर सोहराबुद्दीन के भाई रूबाबुद्दीन ने तीनों आईपीएस के बरी करने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी, वहीं नरेन्द्र अमीन और दलपत सिंह के डिस्चार्ज ऑर्डर के खिलाफ सीबीआई ने अपील की थी। लंबे समय के बाद अब इनकी याचिकाओं पर हाईकोर्ट में 4 जुलाई से सुनवाई होगी। वहीं गुजरात आईपीएस विपुल अग्रवाल को बरी करने की याचिका को सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया था। गत दिनों हाईकोर्ट ने विपुल अग्रवाल की एप्लीकेशन को भी बरी हो चुके आरोपियों से संबंधित एप्लीकेशन के साथ सुनने के आदेश दिए हैं। इनके अलावा गुजरात डीएसपी आरके पटेल, नरेश चौहान, कांस्टेबल अजय परमार, संतराम, राजस्थान सीआई अब्दुल रहमान, एसआई हिमांशु सिंह, श्याम सिंह की भी डिस्चार्ज एप्लीकेशन सेशन कोर्ट से खारिज हो चुकी हैं। इन सभी ने हाईकोर्ट में इस आदेश के खिलाफ अपील की है और इन सभी की याचिकाएं पेंडिंग चल रही हैं। ऐसे में इनके क्लब होने की संभावना बढ़ गयी है।
मामला एक तो सुनवाई एक साथ होने की संभावना ज्यादा
गत दिनों विपुल अग्रवाल कर ट्रायल पर स्टे की एप्लीकेशन पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि अब इनकी एप्लीकेशन पर अग्रिम सुनवाई बरी हो चुके पांचाें आरोपियों से संबंधित एप्लीकेशन के साथ क्लब कर होगी। विपुल अग्रवाल की एप्लीकेशन क्लब होने के साथ ही बचे हुए सात आरोपियों की एप्लीकेशन को भी क्लब कर हाईकोर्ट में सुनवाई करने की संभावना बढ़ गई है। खासबात है कि इनमें से कुछ आरोपियों की डिस्चार्ज एप्लीकेशन तो 2016 से हाईकोर्ट में पेडिंग चल रही है और सभी को अलग-अलग पेशी तारीखें मिल रही हैं। जबकि सभी का मामला एक ही है।
नए सिरे से होगी सुनवाई
बरी हो चुके तीनों आईपीएस सहित पांचों पुलिसकर्मियों से संबंधित एप्लीकेशन पर फरवरी में हाईकोर्ट की जस्टिस रेवती डेरे ने तीन हफ्तों तक लगातार सुनवाई की थी। तब हाईकोर्ट बैंच असाइनमेंट चेंज हो गया था। ऐसे में अब इस प्रकरण की नए सिरे से दोबारा सुनवाई होगी। अब इसकी सुनवाई जस्टिस बदर करेंगे।
सीबीआई के दोहरे मापदंड
सीबीआई के इस केस में शुरुआत से ही रसूखदार, उच्च अधिकारियों और अधिनस्थ पुलिस कर्मियों को लेकर दोहरे मापदंड रहे है।
: सेशन कोर्ट से आईपीएस दिनेश एमएन, डीजी बंजारा और राजकुमार पांड्यन के बरी होने सीबीआई ने इनके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील नही की, जबकि डीएसपी नरेंद्र अमीन और कांस्टेबल बरी हुए तो सेशन कोर्ट के इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
: ट्रायल में भी सीबीआई ने दोहरा मापदंड रखा। ट्रायल शुरू होने के समय तक एक मात्र आईपीएस विपुल अग्रवाल ही केस में बचे थे। इनकी डिस्चार्ज एप्लिकेशन सेशन कोर्ट से खारिज हुई थी, ये हाई कोर्ट गए और ट्रॉयल शुरू होने से पहले ट्रायल पर स्टे लेकर आए, लेकिन सीबीआई ने स्टे हटवाने के कोई प्रयास नहीं किये। स्टे के 6 महीने बाद जून में आई पेशी पर हाई कोर्ट ने जब सीबीआई से जवाब मांगा, तो सीबीआई ने स्टे हटवाने का प्रयास करने के बजाए जवाब पेश करने के लिए और समय मांग लिया। केस में एक मात्र पुलिस अधिकारी की ट्रायल पर स्टे है, बाकी 22 अधिनस्थ पुलिस कर्मी ट्रायल फेस कर रहे है और 117 गवाह भी हो चुके हैं।