साेहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में गुरुवार को मुंबई में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में उस मोबाइल से संबंधित दो गवाह कल्याण सिंह पंवार और बसंत भाई बारोट के बयान हुए, जो मोबाइल तुलसी के फरार होते समय ट्रेक पर पड़ा मिला था। गवाह बसंत भाई ने कोर्ट को बताया कि 2006 में उनका हिम्मत नगर रेलवे स्टेशन पर पार्किंग का ठेका था। दोपहर डेढ़-दो बजे उनको जीआरपी चौकी पर बुलाया। वे पहुंचे तब जीआरपी अधिकारी और राजस्थान पुलिस के अधिकारी मौजूद थे। टेबल पर एक मोबाइल रखा हुआ था।
जीआरपी अधिकारी ने मुझे बताया कि यह मोबाइल मुकदमें में सील करना है और मुझे इसके पंच में रहना है। मेरे साथ कल्याण सिंह भी था। हमारे सामने उस काले रंग के मोबाइल को कपड़े में लपेटकर प्लास्टिक बैग में रखकर सील किया गया था और फर्द रिपोर्ट बनाई थी। जिस पर हमने साइन भी किए थे। बसंत भाई के बयान पर कोर्ट में उन्हें सील्ड मोबाइल, फर्द रिपोर्ट और उस पर उनके साइन दिखाए गए, जिनकी उन्होंने पहचान की। रेलवे स्टेशन के बाहर फल का ठेला लगाने वाले कल्याण सिंह ने भी कोर्ट में हुए बयान के दौरान सील्ड मोबाइल, फर्द रिपोर्ट और पंचनामा पर खुद के हस्ताक्षर की पहचान की। बसंत भाई और कल्याण सिंह ने कोर्ट में बयान के दौरान एएसआई नारायण सिंह, युद्धवीर सिंह और करतार सिंह को पहचाना कि यही पुलिस अधिकारी जीआरपी थाने में मोबाइल सील करते समय मिले थे।
मैंने कभी किराए पर गाड़ी देने का काम नहीं किया
बसंत भाई ने कोर्ट को बयान देते समय बताया कि उन्होंने कभी गाड़ी किराए पर देने का काम नहीं किया है और किसी गाड़ी के लिए उनके पास जीआरपी कांस्टेबल प्रताप भाई का कभी कोई फोन भी नहीं आया था। यहां तक कि वे प्रताप भाई कौन है, ये जानते तक नहीं है और न ही महिपाल को जानते हैं, तो पालनपुर के लिए कार देने का तो सवाल ही नहीं बनता है। इस पर सीबीआई ने उसे होस्टाइल कर दिया। सीबीआई ने चार्जशीट में बताया है कि तुलसी के एनकाउंटर से पहले जीआरपी पुलिस ने राजस्थान पुलिस को एक कार व्यवस्था कर दी थी, ताकि वे पालनपुर पहुंच सकें।
अंग्रेजी में लिखा था बयान, सीबीआई ने पढ़कर भी नहीं सुनाया
गवाह कल्याण सिंह से कोर्ट में पूछा गया कि क्या सीबीआई ने उनके कभी बयान लिए थे, तो उन्होंने बताया कि सीबीआई ने एक बार बुलाया था। कुछ कागज दिखाए थे, लेकिन वे अंग्रेजी में लिखे थे, तो मैं पढ़ नहीं पाया। सीबीआई ने भी कागज मुझे पढ़कर नहीं बताए थे, ऐसे में उनमें क्या लिखा था, मुझे नहीं पता।



