जबकि सीबीआई चार्जशीट में बताई कहानी में तुलसी के भागने के तथ्य को स्वीकार नहीं करती है। सीबीआई चार्जशीट के अनुसार तुलसी न तो ट्रेन से भागा था, न ही पुलिस वालों पर किसी ने मिर्च पाउडर फेंका था और न ही कोई मोबाइल गिरा था। यही कारण है कि ट्रेन गार्ड और असिस्टेंट लोको पायलट के बयानों के बाद सीबीआई ने दोनों को होस्टाइल कर दिया।
ट्रेन में आखिरी डिब्बे में हथकड़ी पहने कैदी और पुलिस वाले बैठे थे
कोर्ट में हीरालाल ने बयान दिए कि वह हिम्मतनगर स्टेशन से गार्ड ड्यूटी पर उदयपुर मेल ट्रेन में बैठा था। उसने इंजन से आखिरी डिब्बे तक राउंड लिया था। जोर-जोर से बात करने के कारण उसका ध्यान आखिरी डिब्बे में बैठे कुछ पुलिसवालों और पास बैठे कैदी पर गया। कैदी के हाथ में हथकड़ी। राउंड लेने के बाद वह गार्ड बोगी में चला गया। देर रात श्यामला जी से कुछ पहले ट्रेक का काम चलने से ट्रेन 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। अचानक कुछ पटाखों जैसी आवाज सुनी और ट्रेन रुक गई। लोको पायलट राजेन्द्र ने वॉकी-टॉकी पर बताया कि आखिरी डिब्बे में चेन पुलिंग होने से ट्रेन रुकी है। इस पर वह आखिरी बोगी पहुंचा। वहां बाहर कुछ पुलिस वाले आंख मसल रहे थे, उनके कपड़ों और फर्श पर मिर्च पाउडर पड़ा था।
पुलिसवालों के कपड़ों पर पड़ा था मिर्च पाउडर
गार्ड ने आगे कोर्ट को बयान दिए कि पुलिस वालों ने खुद को राजस्थान पुलिस से बताया और जानकारी दी कि एक कैदी साथियों के सहयोग से हमारे आंखों में मिर्च पाउडर डालकर फरार हुआ है। दो पुलिस वाले कैदी के पीछे भी भागे थे। ट्रेक पर देखा तो एक मोबाइल पड़ा था, जिसे वहां से उठाया। ट्रेन पुल पर रुकी थी और नीचे नदी थी, तो कोई सवारी नहीं गिर जाए, इसलिए ट्रेन को पुल से थोड़ा आगे बढ़ाकर रोका। कैदी के पीछे गए पुलिसवाले गैंगमैन के साथ वापस ट्रेन पहुंचे। गार्ड हीरालाल ने बताया कि उसने पूरा घटनाक्रम, पुलिसवालों के नाम नारायण सिंह, युदवीर, करतार, दलपत और ट्रेन देरी का कारण गार्ड लॉग बुक में लिखा, इसके बाद ट्रेन श्यामला जी पहुंची। श्यामलाजी स्टेशन पर इस घटनाक्रम की सूचना दी और पुलिस वालों को वहीं उतारा गया।
पटाखों जैसी आवाज गोलियों की भी हो सकती है
क्रॉस में पुलिस एएसआई नारायण सिंह के वकील अभिषेक पाराशर के पूछने पर गार्ड हीरालाल ने बताया कि वह पटाखों जैसी आवाज गोलियों की भी हो सकती है। उसे जो मोबाइल ट्रैक पर पड़ा मिला था, वह उसने कैदी या उसके साथियों का मानकर उन पुलिस वालों के ही सुपुर्द कर दिया था। इस दौरान वहां असिस्टेंट लोको पायलट घनश्याम भी आ गए थे। तीसरे बयान तत्कालीन डीएसबी शाखा के पुलिसकर्मी खूम सिंह के हुए। खूम सिंह ने कोर्ट को सोहराबुद्दीन के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी दी।