सीबीआई ने लिखे झूठे बयान, मैंने जो आज कहा वही सीआईडी, पुलिस और कोर्ट को बताया था : गवाह मुन्नी बाई
सोहराबुद्दिन-तुलसी एनकाउन्टर केस में मंगलवार को मुम्बई में सीबीआई की विशेष अदालत में तुलसी की मकान मालिक मुन्नी बाई पत्नी कोमल झा, इनके पड़ोसी शंकर और कांस्टेबल चंदू लाल के बयान हुए। पड़ोसी शंकर ने बताया कि पुलिस जिस दिन तुलसी को पकड़ने आई थी उस दिन मेरा मंगलवार का व्रत था। मुन्नी बाई ने कहा मैंने आज यहाँ कोर्ट में जो बताया है, वही बयान सीआईडी, सीबीआई और 2011 में गांधी नगर की कोर्ट में दिए थे। सीबीआई ने जो बयान लिखे वे मैंने नही दिए, वे झूठे है।
शंकर ने कोर्ट को बताया कि वह भीलवाड़ा में कोमल झा का पड़ोसी था, और एक समीर नाम का लड़का झा के यहाँ किरायेदार था। नवम्बर आखिरी में उस दिन मेरा मंगलवार का व्रत था तो मैं दोपहर में ही घर आ गया था और वापस काम पर नही गया था। तभी मैंने घर के बाहर काफी शोर सुना। बाहर देखा तो कुछ लोगो ने समीर को पकड़ा हुुुआ था। पूूूछनेे पर बताया कि वो लोग उदयपुर पुलिस में है और समीर का असली नाम तुलसी है और वह उदयपुर में हत्या कर फरार हुआ है। इसके बाद पुलिस उसे अपने साथ ले गईं। अगले दिन न्यूज़ पेपर में उसकी गिरफ्तारी, गैंग और अपराध की पूरी खबर छपी हुई पढ़ी। सीबीआई ने कहा उस दिन शनिवार था तो शंकर ने कहा नही उस दिन मंगलवार था और मेरा उस दिन व्रत भी था। इसलिए तारीख याद नही है, लेकिन दिन याद है। इस पर सीबीआई ने शंकर को होस्टाइल घोषित किया। गौरतलब है कि 2006 के आखिरी सप्ताह में आया मंगलवार 29 नवम्बर को था।
तुलसी 10-15 दिनों से कहीं नहीं गया था
मुन्नी बाई ने कोर्ट को बताया कि 2006 में फरवरी या मार्च में उनके भीलवाड़ा स्थित घर पर एक समीर नाम का लड़का किराए पर रहने आया था और आलू प्याज का धंधा करता था। वह करीब 7-8 महीने हमारे यहाँ रहा। नवम्बर आखिरी में एक दिन घर के बाहर काफी शोर सुनाई दिया। बाहर जाकर देखा यो कुछ लोगों ने समीर को पकड़ा हुआ था। मैंने उनसे पूछा तो उन्होंने खुद को पुलिस बताया और कहा कि एक हत्या के मामले में ये फरार है। पुलिस ने बताया था कि इसका नाम तुलसी है। पुलिस वाले उसे ले गए और करीब 10 दिनों बाद वापस उसे लेकर आए। उसके कमरे की तलाशी ली और कुछ सामान जब्त कर ले गए। इसके बाद कोई नही आया। सीबीआई के वकील के पूछने पर मुन्नी बाई ने बताया कि पकड़े जाने से पहले 10-15 दिन से समीर कहीं नहीं गया था, भीलवाड़ा में ही था और रोज घर आ रहा था। इस पर मुन्नी बाई को सीबीआई ने होस्टाइल घोषित किया।
आगे मुन्नी बाई ने कोर्ट को बताया कि तुलसी की गिरफ्तारी के संबंध में सबसे पहले सीआईडी ने बयान लिए थे। फिर सीबीआई ने लिए और बाद में हमारे गांधी नगर कोर्ट में बयान करवाए गए थे। मैंने हर बार यही बयान दिए थे जो आज कोर्ट को बताया है। इसके अलावा कोई बयान है तो वे झूठे लिखे गए है।
गौरतलब है कि मुन्नी बाई ने आज जो कोर्ट को बताया, वही जानकारी सीआईडी और गांधी नगर कोर्ट में हुए बयान में दी, हालांकि सीबीआई ने बयान इससे अलग लिखे है।
मैं कॉन्सटेबल था, मैंने कोई हथियार ईशु नहीं किया
2006 में उदयपुर पुलिस लाइन के कांस्टेबल चंदू लाल ने कोर्ट को बताया कि उसकी पुलिस लाइन में सामान्य ड्यूटी रहती थी। 2012 में एक बार एक रजिस्टर लेकर मुझे अधिकारियों ने गांधीनगर सीआईडी ऑफिस भेजा था। मैं रजिस्टर लेकर गया था। वहाँ रजिस्टर दिया था और रसीद लेकर लौट आया था। सीबीआई के सरकारी वकील ने एएसआई को हथियार ईशु करने की बात पूछी तो कांस्टेबल ने बताया कि 2006 में वह कांस्टेबल था। हथियार ईशु आरमोरर साब करते है। उसने किसी को कोई हथियार ईशु नही किया था। सीबीआई ने कोर्ट में बैठे एएसआई नारायण सिंह को पहचानने के लिए कहा तो कांस्टेबल ने मना कर दिया कि वह एएसआई को नहीं पहचानता है। इस पर सीबीआई ने इसे भी होस्टाइल बताया।


