लेखिका मीनाक्षी नागदा ने काव्य संग्रह में अनुभवों को किया जीवंत
उदयपुर, एआर लाइव न्यूज। युगधारा की ओर से विज्ञान समिति, उदयपुर के सभागार में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम में मीनाक्षी नागदा के काव्य संग्रह ‘इस जीत को अनाम रहने दो’ पुस्तक का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों ने कविता के महत्व, संवेदनाओं और समाज में साहित्य की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। Udaipur Meenakshi Nagda Book “Is Jeet Ko Anaam Rehne Do” Launch
मुख्य अतिथि महाराणा प्रताप कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. उमाशंकर शर्मा, विशिष्ट अतिथि कहानीकार माधव नागदा गीतकार, कवि एवं समीक्षक प्रमोद सनाढ्य और युगधारा अध्यक्ष प्रकाश तातेड़ ने मीनाक्षी नागदा की पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम में उदयपुर के साहित्यकार, विषय विशेषज्ञ और गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
‘कविता साधना, सेवा और समर्पण है’
पुस्तक के लोकार्पण पर लेखिका मीनाक्षी नागदा ने कहा कि उन्होंने कविता संग्रह के रूप में अपने भाव और अनुभव अर्पित किए हैं। यदि ये पाठकों के मन को छूते हैं, तो यह उनकी संवेदना है और यदि कोई कमी है, तो वह उनकी अपनी है।
समीक्षक प्रमोद सनाढ्य ने कहा कि कविता केवल सोच-विचार नहीं, बल्कि साधना, सेवा और समर्पण है। कविता समय और परिस्थितियों के अनुसार अपना रूप बदलती है। यही विशेषता मीनाक्षी नागदा के काव्य संग्रह में दिखाई देती है। उन्होंने युगधारा की ओर से किए जा रहे साहित्यिक प्रयासों और गतिविधियों की सराहना की।
कहानीकार माधव नागदा ने कहा कि पुस्तकें बारूद के खिलाफ खड़ी हो सकती हैं। कविता में कल्पना और विचारों का समावेश होता है तथा यह व्यक्ति को अपनी आत्मा से साक्षात्कार कराती है।

