नजरें मेयर पद पर : उदयपुर नगर निगम में सातवीं बार बनेगा भाजपा का बोर्ड
देवेंद्र शर्मा,उदयपुर उदयपुर, एआर लाइव न्यूज। नगर निगम उदयपुर में भाजपा का सातवीं बार बोर्ड बनना तय हो गया है। सोमवार को घोषित चुनाव परिणाम में भाजपा ने 80 में से 53 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 23 वार्ड मिले। एक वार्ड में माकपा और तीन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे। अब राजनीतिक चर्चा का केंद्र उदयपुर के नए मेयर को लेकर है। | Udaipur Mayor Election 2026 | latest news Udaipur Mayor Election 2026
नगर निगम चुनाव में कुल 220 प्रत्याशी मैदान में थे। भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद मेयर पद के लिए पार्टी के भीतर दावेदारी और राजनीतिक समीकरण तेजी से चर्चा में हैं। | Udaipur Mayor Election 2026
मेयर पद की दौड़ में तीन प्रमुख नाम
उदयपुर के नए मेयर को लेकर फिलहाल भाजपा के तीन नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं—प्रमोद सामर, पारस सिंघवी और दिनेश भट्ट। हालांकि भाजपा पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण पदों पर अप्रत्याशित चेहरों को मौका देती रही है। ऐसे में मेयर पद पर किसी चौथे नाम की संभावना से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
मेयर पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। मौजूदा राजनीतिक समीकरण में प्रमोद सामर और पारस सिंघवी जैन समाज से, जबकि दिनेश भट्ट ब्राह्मण समाज से आते हैं। तीनों ही नेता चुनाव से पहले से ही अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति बनाने में जुटे हुए थे और अब तीनों के पार्षद निर्वाचित होने के बाद मेयर की दौड़ दिलचस्प हो गई है।
प्रमोद सामर: राजनीतिक बिसात के लिए चर्चित
प्रमोद सामर को भाजपा की राजनीति में रणनीति और राजनीतिक समीकरण साधने वाले नेताओं में माना जाता है। पिछले जिला परिषद चुनाव के दौरान तत्कालीन देहात जिलाध्यक्ष भंवरसिंह पंवार के साथ उनकी भूमिका चर्चा में रही थी। उस समय ममता कुंवर के जिला प्रमुख बनने के पीछे सामर-पंवार की रणनीति ( राजनीतिक बिसात ) को अहम माना गया था। उस समय ऐसी बिछात बिछाई कि पंवार की बेटी ममता कुंवर को उदयपुर का जिला प्रमुख बनने से कोई रोक नहीं पाया।
इस बार मेयर पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सामर ने निगम चुनाव में पार्षदों के टिकट वितरण के दौरान भी भविष्य के मेयर चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की थी।
भाजपा के टिकट वितरण में शहर संगठन की भूमिका अहम रहती है। ऐसे में शहर जिलाध्यक्ष गजपालसिंह राठौड़ और प्रमोद सामर के बीच राजनीतिक समीकरण को भी इस दौड़ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सामर का निगम चुनाव लड़ना भी केवल पार्षद बनने तक सीमित था या इसके पीछे मेयर पद की रणनीति थी, इसका फैसला आने वाले दिनों में होगा।
पारस सिंघवी: पुराने संघर्ष को नई धार
मेयर पद के प्रमुख दावेदारों में पारस सिंघवी का नाम भी मजबूती से लिया जा रहा है। सिंघवी पिछले बोर्ड में उप महापौर रह चुके हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान उदयपुर शहर से भाजपा टिकट के लिए उन्होंने मजबूत दावेदारी पेश की थी, लेकिन टिकट ताराचंद जैन को मिला।
विधानसभा टिकट की उस दौड़ में शहर भाजपा के भीतर सामने आए राजनीतिक घटनाक्रम अब भी चर्चा में हैं। इस बार मेयर पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद सिंघवी ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई और मेयर पद को ध्यान में रखते हुए पार्षद का चुनाव लड़ा।
अब सवाल यह है कि पारस सिंघवी का राजनीतिक संघर्ष प्रमोद सामर की रणनीति के सामने कितना प्रभावी साबित होता है।
दिनेश भट्ट: अनुभव के साथ लॉबिंग का सहारा
मेयर पद की दौड़ में तीसरा प्रमुख नाम दिनेश भट्ट का है। भट्ट लंबे समय तक भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष रहे हैं और संगठन तथा सत्ता की राजनीति में उनका लंबा अनुभव है।
भाजपा के भीतर भट्ट के समर्थन में लॉबिंग (पैरवी) तेज होने की चर्चा है। उनके समर्थकों की ओर से राजनीतिक अनुभव के साथ सामाजिक समीकरण को भी आधार बनाया जा रहा है। तर्क यह है कि उदयपुर शहर विधायक जैन समाज से हैं और भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष राजपूत समाज से हैं, ऐसे में मेयर पद पर ब्राह्मण चेहरे को अवसर दिया जाना सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से उचित होगा।
ऐसे में मेयर चुनाव में मुकाबला केवल व्यक्तिगत दावेदारी का नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति, संगठनात्मक समर्थन और सामाजिक समीकरणों का भी होगा।
उदयपुर नगर निगम में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण मेयर का फैसला भाजपा के पार्षदों के बीच शक्ति संतुलन और पार्टी नेतृत्व के निर्णय पर निर्भर करेगा। फिलहाल तीनों दावेदारों की अपनी-अपनी ताकत है।
- प्रमोद सामर — संगठन और राजनीतिक रणनीति के लिए चर्चित
- पारस सिंघवी — पूर्व उप महापौर और लंबे राजनीतिक संघर्ष का अनुभव
- दिनेश भट्ट — संगठनात्मक अनुभव और वरिष्ठ नेताओं के बीच मजबूत संपर्क
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मेयर की कुर्सी तक किसकी रणनीति पहुंचेगी—सामर की बिसात, सिंघवी का संघर्ष या भट्ट की लॉबिंग?
21 सितंबर को होगा मेयर का चुनाव
उदयपुर नगर निगम के मेयर का चुनाव 21 सितंबर 2026 को होगा। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से 15 सितंबर को लोक सूचना जारी की जाएगी। मेयर पद के लिए नामांकन 16 सितंबर तक दाखिल किए जा सकेंगे। यदि मतदान आवश्यक हुआ तो 21 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान होगा। इसके तत्काल बाद मतगणना कर परिणाम घोषित किया जाएगा। 22 सितंबर को उप महापौर का चुनाव होगा।
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