गीतांजली हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने बचाई मां और नवजात की जान
उदयपुर। उदयपुर स्थित गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल (GMCH) के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने गंभीर पीलिया, हेपेटाइटिस-ए संक्रमण और एक्यूट लिवर फेल्योर से जूझ रही गर्भवती महिला का सफल सामान्य प्रसव कराते हुए मां और नवजात दोनों की जान बचाई। | Geetanjali Hospital Udaipur
धरियावद निवासी 30 वर्षीय रानी को गर्भावस्था के नौवें माह में रात करीब 11 बजे अचेत अवस्था में गीतांजली हॉस्पिटल के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया गया। परिजनों ने बताया कि महिला को पिछले दो दिनों से तेज बुखार था और पीलिया के लक्षण भी दिखाई दे रहे थे। अस्पताल पहुंचने पर उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी।
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नीलम तोषनीवाल ने तुरंत प्राथमिक परीक्षण कर उपचार शुरू किया। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए पेट, आंत एवं लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ. कार्तिकेय माथुर को तत्काल बुलाया गया। मरीज को आईसीयू में भर्ती कर व्यापक जांच कराई गई, जिसमें हेपेटाइटिस-ए संक्रमण के कारण एक्यूट लिवर फेल्योर (Acute Liver Failure) और हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी (Hepatic Encephalopathy) की पुष्टि हुई। साथ ही गर्भावस्था भी जटिल अवस्था में थी, जिससे मां और गर्भस्थ शिशु दोनों की जान को खतरा था।
लिवर सपोर्ट थेरेपी और वेंटिलेटर पर शुरू हुआ उपचार
डॉ. कार्तिकेय माथुर के नेतृत्व में मरीज को तत्काल लिवर सपोर्ट थेरेपी, जीवनरक्षक दवाइयां और वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। वहीं डॉ. नीलम तोषनीवाल तथा नवजात शिशु रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुशील गुप्ता सहित विशेषज्ञों की टीम ने पूरी रात मां और गर्भस्थ शिशु की लगातार निगरानी की।
गंभीर स्थिति में कराया सफल सामान्य प्रसव
मरीज की हालत को देखते हुए विशेषज्ञ टीम ने समय पर महत्वपूर्ण निर्णय लिया। पूरी रात चले उपचार और गहन निगरानी के बाद तड़के करीब 3 बजे अत्यंत गंभीर स्थिति के बावजूद महिला का सफल सामान्य प्रसव (Normal Delivery) कराया गया। उस समय मरीज लिवर फेल्योर, हेपेटाइटिस-ए संक्रमण, बेहोशी और जटिल गर्भावस्था जैसी कई गंभीर परिस्थितियों से जूझ रही थी।
चिकित्सकों की त्वरित निर्णय क्षमता, समन्वित उपचार और बहुविषयक विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास से मां और नवजात दोनों को सुरक्षित बचाया जा सका।
आईसीयू से वार्ड तक तेजी से हुआ स्वास्थ्य लाभ
जन्म के बाद नवजात की देखभाल डॉ. सुशील गुप्ता और उनकी टीम ने संभाली, जबकि लिवर एवं क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों ने आईसीयू में मां का उपचार जारी रखा। अगले ही दिन मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। उसे सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटाया गया और दो से तीन दिनों के भीतर ऑक्सीजन सपोर्ट की भी आवश्यकता समाप्त हो गई।
लगातार लिवर सपोर्ट थेरेपी और उपचार से मरीज के लिवर की कार्यक्षमता में भी सुधार हुआ। बाद में उसे आईसीयू से स्त्री एवं प्रसूति वार्ड में स्थानांतरित किया गया तथा एक दिन की निगरानी के बाद नवजात शिशु के साथ वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। चिकित्सकीय निगरानी में दोनों पूरी तरह स्वस्थ होने पर आवश्यक परामर्श के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ टीमवर्क का उदाहरण
गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल के चिकित्सकों के अनुसार यह सफलता अस्पताल में उपलब्ध अत्याधुनिक आपातकालीन सुविधाओं, मल्टीडिसिप्लिनरी चिकित्सा प्रणाली, क्रिटिकल केयर, लिवर विशेषज्ञों, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों तथा नवजात विशेषज्ञों के समन्वय का परिणाम है। समय पर उपचार और सही चिकित्सकीय निर्णय के कारण अत्यंत गंभीर स्थिति के बावजूद मां और नवजात दोनों का जीवन सुरक्षित बचाया जा सका।
मुख्य बिंदु (Highlights)
- हेपेटाइटिस-ए संक्रमण से एक्यूट लिवर फेल्योर की शिकार गर्भवती का सफल उपचार
- गंभीर स्थिति के बावजूद कराया गया सामान्य प्रसव, मां और नवजात दोनों सुरक्षित
- बहुविषयक विशेषज्ञ टीम के समन्वित प्रयास से बची दो जिंदगियां
- आईसीयू, लिवर सपोर्ट थेरेपी और नवजात विशेषज्ञों की सतत निगरानी से मिली सफलता


