अंतर्राष्ट्रीय मंच पर सांसद ने खुलकर रखी आदिवासी हितों की बात
उदयपुर, एआर लाइव न्यूज। राजस्थान के बांसवाड़ा से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय में आयोजित एक्सपर्ट मैकेनिज्म ऑन द राइट्स ऑफ इंडिजिनस पीपुल्स (EMRIP) के 19वें सत्र में भाग लेकर भारत सहित विश्वभर के आदिवासी समुदायों से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से उठाया।
13 से 17 जुलाई तक आयोजित इस वैश्विक सत्र में अपने संबोधन के दौरान सांसद रोत ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि आदिवासी प्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज द्वारा उठाए जाने वाले मुद्दों को गंभीरता से सुना जाए तथा संबंधित देशों की सरकारों के साथ सार्थक संवाद स्थापित कर उनके समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। यूएन, जेनेवा के अंतर्राष्ट्रीय मंच पर क्या बोले रोत सुनिए:-
ILO Convention 169 पर हस्ताक्षर की मांग
राजकुमार रोत ने भारत सरकार से अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के Convention No. 169 पर हस्ताक्षर करने की मांग की। उनका कहना था कि इससे आदिवासी समुदाय के जल, जंगल, जमीन और पारंपरिक अधिकारों को मजबूत कानूनी संरक्षण मिलेगा तथा उनके सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
पारंपरिक धार्मिक आस्था को मिले संवैधानिक मान्यता
अपने संबोधन में सांसद रोत ने आदिवासी समाज की पारंपरिक धार्मिक आस्थाओं को संवैधानिक मान्यता देने की आवश्यकता भी जताई। उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक पहचान और परंपराओं को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

मूल निवासी के रूप में मान्यता पर रखा पक्ष
रोत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से यह भी कहा कि भारत के प्रोटो-ऑस्ट्रालॉइड, नीग्रिटो, द्रविड़ और मंगोलॉयड समुदायों को वैश्विक स्तर पर Indigenous Peoples (मूल निवासी) के रूप में मान्यता दिए जाने पर विचार किया जाना चाहिए।
भील समाज का प्रतिनिधित्व करना बताया सम्मान
संयुक्त राष्ट्र के मंच पर अपनी भागीदारी को ऐतिहासिक बताते हुए सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि भारत के भील आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने कहा, “यह केवल मेरी आवाज नहीं, बल्कि देशभर के आदिवासी भाई-बहनों की आवाज है, जिसे मैंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखने का प्रयास किया है।”
राजस्थान के आदिवासी बहुल बांसवाड़ा क्षेत्र से सांसद के रूप में राजकुमार रोत की यह अंतरराष्ट्रीय भागीदारी राज्य के आदिवासी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दौरान उन्होंने आदिवासी अधिकार, प्रतिनिधित्व, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक संसाधनों के संरक्षण जैसे मुद्दों को वैश्विक स्तर पर प्रभावी ढंग से रखा।
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