राष्ट्रव्यापी मानवता का महाकुंभ- नारायण सेवा संस्थान का 45वां दिव्यांग एवं निर्धन निशुल्क सामूहिक विवाह समारोह
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। नारायण सेवा संस्थान की ओर से संस्थान परिसर में आयोजित दो दिवसीय 45वां दिव्यांग एवं निर्धन निशुल्क सामूहिक विवाह समारोह रविवार को खुशियों, आशीर्वाद और मानवीय संवेदना के साथ सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए 51 दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चारण और पवित्र अग्नि को साक्षी मानते हुए सात फेरे लेकर जीवन की नई यात्रा शुरू की। सामूहिक विवाह में शामिल 51 जोड़ों में 25 दिव्यांग और 26 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हैं। Narayan Seva Sansthan 45th Mass Wedding ceremony for Differently abled compeletes
संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य दिव्यांगजनों को सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर जीवन का अवसर देना है। इन जोड़ों में ऐसे कई युवक-युवतियां शामिल हैं, जो मिसाल हैं दूसरों के लिए। जिन्होंने विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता के बावजूद जीवन से कभी हार नहीं मानी। कोई पैरों से दिव्यांग है, कोई एक हाथ या पैर से, तो कुछ दृष्टिबाधित हैं। जीवन की कठिन राहों से गुजरने वाले ये जोड़े अब एक-दूसरे का सहारा बनकर नए सपनों के साथ आगे बढ़ेंगे। अधिकांश जोड़ों ने संस्थान में ही निशुल्क सर्जरी, कृत्रिम अंग, कैलिपर्स और पुनर्वास सेवाएं प्राप्त कीं और कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी। Narayan Seva Sansthan | Divyang Mass Wedding | Mass Wedding for Differently abled | Udaipur Destination Wedding

सकलांग युवक ने दिव्यांग युवती को बनाया जीवनसाथी
प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि सकलांग युवक के लिए दिव्यांग युवती का हाथ थामना अटूट प्रेम और समर्पण की बड़ी मिसाल है। यहां एक ऐसे जोड़े की प्रेम कहानी है, जिसमें उत्तर प्रदेश के घनश्याम ने एक पैर से दिव्यांग बिहार की किरण कुमारी को जीवनसाथी बनाने का फैसला किया। खासबात है कि उनके जीवनसाथी बनने के सफर की शुरूआत भी ट्रेन के सफर में हुई मुलाकात से हुई थी। घनश्याम के नाश्ते की दुकान है और किरण संविदा टीचर हैं।
वहीं गुजरात के बनासकांठा जिले के विजय गमार ने उदयपुर के चिखला गुड़ा की मंजू को जीवनसंगिनी चुना, जो पैरों से दिव्यांग हैं। विजय का कहना है कि मंजू भले ही शारीरिक रूप से दिव्यांग हों, लेकिन उन्हें विश्वास है कि वे उनके जीवन को खुशियों और उम्मीदों से भर देंगी।

पारंपरिक रस्मों के बीच लिए सात फेरे
पारंपरिक वाद्ययंत्रों और मंगल ध्वनियों के बीच सभी जोड़ों का स्वागत कर तोरण की रस्म सम्पन्न कराई गई। इसके बाद सुसज्जित मंच पर वर-वधुओं ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई। 51 वेदियों पर आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सात फेरे सम्पन्न कराए, जहां हर फेरे के साथ जीवन भर साथ निभाने के सात पवित्र वचन गूंज उठे।

नवदंपतियों को गृहस्थी की सौगात
संस्थान की ओर से प्रत्येक जोड़े को नई गृहस्थी बसाने के लिए पलंग, बिस्तर, अलमारी, बर्तन, गैस चूल्हा, डिनर सेट, पंखा और अन्य आवश्यक सामग्री भेंट की गई। कन्यादानियों और अतिथियों ने भी मंगलसूत्र, चूड़ियां, पायल और अन्य उपहार देकर नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और भावुक विदाई
समारोह में शिव-पार्वती और कृष्ण-रुक्मिणी विवाह पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। विवाह के बाद नववधुओं की प्रतीकात्मक डोली विदाई के क्षणों ने माहौल को भावुक कर दिया, जहां खुशी और भावनाओं के आंसू साथ-साथ बहते नजर आए। समारोह के मुख्य अतिथि दर्शना मेहता, यश मेहता और ओम प्रकाश सोनी सहित संस्थान संस्थापक पद्मश्री कैलाश मानव, कमला देवी, वंदना अग्रवाल, पलक अग्रवाल सहित अन्य अतिथिगण, दानदाता और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। संस्थान में अब तक 2510 दिव्यांग एवं निर्धन युवक-युवतियों के विवाह सम्पन्न कराए जा चुके हैं।

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