पीएमसीएच में हुई दक्षिण राजस्थान की ऐसी पहली सर्जरी
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर के भीलों का बेदला स्थित पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के कार्डियोथोरेसिक विभाग के चिकित्सकों ने 59 वर्षीय मरीज की नॉन-इंट्यूबेटेड वीडियो-असिस्टेड थोरैकोस्कोपिक सर्जरी (एनआईवीएटीएसा कर उसे नया जीवन प्रदान किया है। दक्षिणी राजस्थान यह अपनी तरह की पहली ऐसी सफल सर्जरी मानी जा रही है, जहां गंभीर घायल मरीज को बिना वेंटिलेटर पर लिए फेफड़ों का ऑपरेशन किया गया हो। इस सफल सर्जरी को चीन के ग्वांगझू से प्रशिक्षित थोरैकोस्कोपिक सर्जन डॉ. अनुज मेहता ने किया है। udaipur pmch doctors done Complex lung surgery successfully without anesthesia
डॉ. अनुज मेहता ने बताया कि सामान्यतः छाती की सर्जरी के लिए मरीज को जनरल एनेस्थीसिया देकर गले में एंडोट्रैकियल ट्यूब डाली जाती है और फेफड़ों को वेंटिलेटर से नियंत्रित किया जाता है। लेकिन एनआईवीएटीएस तकनीक में मरीज को कृत्रिम सांस देने की जरूरत नहीं पड़ी। आईवी सेडेशन और लोकल एनेस्थीसिया के जरिए मरीज पूरी सर्जरी के दौरान प्राकृतिक रूप से सांस लेता रहा, जिससे वेंटिलेटर से जुड़ी जटिलताओं का खतरा शून्य हो गया।
एक्सीडेंट में पसलियों में कई फ्रेक्चर हो गए थे और अत्यधिक रक्स्त्राव होने से स्थिति बेहद गंभीर थी
पीएमसीएच के चेयरमैन राहुल अग्रवाल के अनुसार लोसिंग निवासी 59 वर्षीय पर्वत सिंह की बाइक से घर आते समय गाय से टकरा जाने से पसलियों में कई जगह फ्रैक्चर, कंधे की हड्डी चकनाचूर थी एवं तिल्ली की चोट के कारण पेट में भारी रक्तस्राव (हेमोपेरिटोनियम) हो रहा था। मरीज को परिजन अत्यंत नाजुक स्थिति में उसे पीएमसीएच के इमरजेंसी में लेकर आए।
जहां सर्जन डॉ. रेणू रांवका एवं उनकी टीम ने मरीज को तुरन्त आईसीयू में शिफ्ट किया। लगभग दो हफ्तों तक आईसीयू में रहने के बाद मरीज की हालत में सुधार होने और स्थिति थोड़ी स्थिर होने के बाद फेफड़ों की जटिलता को दूर करने के लिए थोरैकोस्कोपिक सर्जन डॉ. अनुज मेहता की टीम ने थोरैकोस्कोपिक सर्जरी का निर्णय लिया गया।
सर्जरी में सबसे बड़ी चुनौती मरीज की पॉजीशनिंग थी
डॉ. अनुज मेहता ने बताया कि सर्जरी की सबसे बड़ी चुनौती मरीज की पोजिशनिंग थी। कंधे की हड्डी टूटी होने के कारण मरीज को करवट दिलाना मुश्किल था। डॉ मेहता और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ समीर गोयल की टीम ने तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए मरीज को सीधा लिटाकर ही यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया। इस सफल टीम में डॉ विद्युत पाटीदार नर्सिंग स्टाफ कुलदीप सिंह, संजय ठाकुर, ललित नागर का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। सर्जरी के मात्र 30 मिनट बाद मरीज पूरी तरह सचेत हो गया और 3 घंटे में खाना-पीना शुरू कर दिया।
डेढ़ माह माह में फेफड़ों की 14 सफल सर्जरी
पीएमसीएच के चेयरमैन राहुल अग्रवाल ने कहा पीएमसीएच थोरेसिक सर्जरी के प्रमुख एक्सीलेंस सेंटर के रूप में उभर रहा है। पिछले मात्र डेढ़ महीने में यहां 14 से अधिक फेफड़ों की सफल मिनिमली इनवेसिव सर्जरी की जा चुकी है, जो संभाग में सर्वाधिक है।
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