वन विभाग एक माह में शुरू करेगा हेल्पलाइन नं. 1926 : वन मंत्री ने विधानसभा में दी जानकारी
जयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। प्रदेश में लेपर्ड के आबादी क्षेत्र में आने की घटना बढ़ती जा रही है, लेकिन लेपर्ड के आबादी क्षेत्र में आने पर सीधे वन विभाग को सूचना देने की कोई सुविधा नहीं है। क्षेत्रवासी पुलिस कंटोल रूम या पास के पुलिस थाने में सूचना देते है उसके बाद वन विभाग को सूचना पहुंचती है। सूचना पहुंचने में कई बाद देर होने से मौके पर इंसान और वन्य जीव आमने सामने होकर यह सामना संघर्ष में बदल जाता है,अब वन विभाग एक हेल्पलाइन नंबर 1926 शुरू करने जा रहा है जिस पर लेपर्ड या अन्य कोई वन्य जीव के आबादी क्षेत्र में आने की सूचना सीधे वन विभाग को दी जा सकेगी। Rajasthan Assembly Budget Session 2026
गुरुवार को राजस्थान विधानसभा में मालवीय नगर से विधायक कालीचरण सराफ के सवाल के जवाब में प्रदेश के वन मंत्री संजय शर्मा ने यह जानकारी दी। वन मंत्री ने कहा कि यह सही है कि वन्य जीव के आबादी क्षेत्र में आने पर या तो पुलिस थाने में सूचना दी जाती है या फिर 100 नंबर पर फोन कर वहां वन विभाग को सूचना पहुंचती है, लेकिन अब वन एवं वन्य जीव से संबंधित समस्या या सूचना सीधे वन विभाग को सूचित करने के लिए विभाग द्वारा प्रत्यक्ष हेल्पलाइन नंबर 1926 करने का काम प्रगति पर है। एक माह में यह हेल्पलाइन नंबर शुरू कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जयपुर शहरी क्षेत्र में ही फरवरी 2025 से नवंबर 2025 तक आबादी क्षेत्र में लेपर्ड के आने की सात घटनाएं हो चुकी है। Rajasthan Assembly Budget Session 2026
सूचना देर से पहुंचती है और भीड़ पहले पहुंच जाती है
विधायक कालीचरण सर्राफ ने वन मंत्री का ध्यान इस तरफ दिलाया कि वन विभाग की कोई एकल हेल्पलाइन की सुविधा नहीं है जहां लोग तुरंत मदद मांग सके। नतीजा यह होता है कि सूचना देर से पहुंचती है और भीड़ पहले पहुंच जाती है। इंसान और वन्य जीव का सामना संघर्ष में बदल जाता है। प्रक्रिया जटील होने से लोग पहले पुलिस प्रशासन या जिला प्रशासन को फोन करते है फिर वहां से वन विभाग तक सूचना पहुंचती है। इस प्रक्रिया में एक से डेढ़ घटा लग जाता है। ऐसे में क्या सरकार 24 घंटे सक्रिय रहने वाली वन्य जीव हेल्पलाइन शुरू करने पर विचार रखती है।
महाराष्ट्र की तर्ज पर इमरजेंसी प्रेडेटर प्रोटोकॉल की व्यवस्था हो : सर्राफ
पूरक प्रश्न में विधायक सर्राफ ने पूछा कि जयपुर शहर के आसपास मौजूद झालाना, आमागढ़ और नाहरगढ़ के लेपर्ड लगातार घनी आबादी वाले क्षेत्र में दाखिल हो रहे है। घटते जंगल और लेपर्ड की बढ़ती संख्या के चलते लेपर्ड टेरेटरी की तलाश में आबादी क्षेत्र में घूस रहा है। क्या महाराष्ट्र की तर्ज पर वन विभाग द्वारा राजस्थान में भी इमरजेंसी प्रेडेटर प्रोटोकॉल (मुख्य रूप से वन्यजीव जैसे तेंदुआ, बाघ, या खतरनाक जानवरों के इंसानी बस्तियों में घुस आने की स्थिति में अपनाई जाने वाली सुरक्षात्मक प्रक्रिया) लागू करने का विचार है।
महाराष्ट्र में सूचना मिलने के तत्काल बाद 5 किलोमीटर का क्षेत्र सील कर दिया जाता है, ताकि लोगों के साथ-साथ वन्य जीव को भी सुरक्षा दी जा सके। इस सवाल के जवाब में वन मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र व अन्य राज्यों में जहां इस प्रकार की योजना प्रचलित है वन विभाग उसका परीक्षण करेगा और प्रयास रहेगा कि इसी वित्तीय वर्ष में एसओपी बनाकर संपूर्ण राजस्थान में लागू करेंगे।
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