जयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। वेदांता लिमिटेड ने जयपुर साहित्य महोत्सव 2026 में अपनी विशेष मौजूदगी का प्रदर्शन किया। जयपुर साहित्य महोत्सव दुनिया के सबसे बड़े साहित्यिक कार्यक्रमों में से एक है, जिसका आयोजन 15 से 19 जनवरी 2026 के बीच किया गया। महोत्सव का उद्घाटन राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने किया, उनके साथ उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी और प्रेम चन्द्र बैरवा भी मौजूद रहे। इस मंच के माध्यम से वेदांता ने उद्योग जगत, संस्कृति एवं समुदाय के बीच तालमेल पर फोकस किया तथा मैटल्स, एनर्जी एवं सामाजिक प्रभाव की कहानी को जीवंत किया। Vedanta Brought the Story of Metals, Culture and Community to Life at Jaipur Literature Festival 2026
पांच दिवसीय जयपुर साहित्य महोत्सव में साहित्य, संस्कृति, विज्ञान, राजनीति एवं समाज से जुड़े गणमान्य दिग्गजों ने हिस्सा लिया, जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता, बुकर पुरस्कार विजेता, पुरस्कार विजेता लेखक, अर्थशास्त्री, फिल्म एवं मनोरंजन जगत से जुड़े व्यक्तित्व तथा संस्कृति से जुड़ी विश्वविख्यात हस्तियां शामिल थीं। महोत्सव में हिस्सा लेने वाले मुख्य प्रवक्ताओं की बात करें तो इनमें जावेद अख़्तर, वीर दास, ज़ीनत अमान, गौर गोपाल दास, सुधा मूर्ति, विश्वनाथ आनंद, स्टीफन फ्राय तथा दुनिया भर से जाने-माने लेखक, विचारक, नीति-निर्माता और कलाकार शामिल रहे।

रोजमर्रा के जीवन में मैटल्स एवं मिनरल्स की भूमिका को दर्शाया
महोत्सव में वेदांता पैविलियन में इंटरैक्टिव एवं इमर्सिव इंस्टॉलेशन्स ने रोजमर्रा के जीवन में मैटल्स एवं मिनरल्स की भूमिका को दर्शाया। गेमीफाईड फॉर्मेट, व्यवहारिक प्रदर्शनियां एवं स्टोरीटैलिंग पर आधारित अनुभवों के साथ आगंतुकों को यह जानने का मौका मिला कि कैसे धातु आधुनिक बुनियादी सुविधाओं, तकनीकों एवं उर्जा प्रणाली के लिए जरूरी हैं।
पैविलियन का आकर्षण केन्द्र था आधुनिक वर्चुअल रिएल्टी अनुभव, जो आगंतुकों को राजस्थान के भीलवाड़ा ज़िले में स्थित वेदांता की रामपुरा अगुचा खान में ले गया। गौरतलब है कि यह दुनिया की सबसे बड़ी ज़िंक उत्पादक खान है। इस वर्चुअल यात्रा ने खनन से लेकर स्मेल्टिंग तक धातु की यात्रा पर रोशनी डाली। अनिल अग्रवाल फाउन्डेशन बागान पर महोत्सव के क्युरेटेड साहित्यिक सत्र आयोजित किए गए। इस मंच पर कई कार्यशालाओं एवं लाईव परफोर्मेन्सेज़ के जरिए भारत की जीवंत कारीगरी की परम्पराओं जैसे लाख की चूड़ी बनाना, ब्लॉक प्रिंटिंग, कठपुतली कला, लोक संगीत एवं नृत्य का जश्न मनाया गया।



