उदयपुर पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल : जिला स्तरीय बैठक
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग(एसटी आयोग) के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने सोमवार को उदयपुर में अधिकारियों की बैठक में एसटी (अनुसूचित जनजाति) की जमीनों पर कब्जे के मामलों में पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। Chairman of National Commission for Scheduled Tribes Antar Singh meeting in Udaipur
उदयपुर कलेक्टर नमित मेहता की मौजूदगी में जिला परिषद सभागार में जिला स्तरीय बैठक में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतरसिंह ने पुलिस द्वारा अनुसूचित जाति एवं जनजाति से जुड़े भूमि विवाद मामलों में जांच के बाद बड़ी संख्या में प्रकरणों को बंद करने पर सवाल उठाया। विशेष रूप से उन मामलों में, जहां अनुसूचित जनजाति की भूमि पर नॉन-एसटी व्यक्तियों द्वारा कब्जा कर लिया जाता है, जबकि कानून के तहत इस पर सख्त कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान है। Chairman of National Commission for Scheduled Tribes Antar Singh meeting in Udaipur
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि कहा कि जांच के दौरान ऐसे कई मामले सिविल नेचर के मानकर बंद कर दिए जाते हैं, जबकि नियमानुसार राजस्व अधिकारी की जांच में कब्जा सामने आने पर पेनल्टी और मुकदमे की कार्रवाई होनी चाहिए। पिछले तीन वर्षों में ऐसे कई प्रकरण बंद कर दिए गए। जिनमें स्पष्ट कब्जा या भूमि विवाद की स्थिति थी। बैठक में एडीएम प्रशासन दीपेंद्र सिंह राठौड़ व टीएडी उपायुक्त रागिनी डामोर सहित कई अधिकारी मौजूद थे।
जांच की समय सीमा अब 60 दिन
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि अब जांच की समय सीमा 90 दिन से घटाकर 60 दिन कर दी गई है। ऐसे में 60 दिन से अधिक लंबित रहने वाले मामलों की रिपोर्ट मांगी। उन्होंने प्रत्येक प्रकरण को समयबद्ध तरीके से निपटाने और भूमि विवाद के मामलों में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अधिकारी जनजाति इलाकों में रात्रि विश्राम करें, तभी उनकी समस्याओं का पता चलेगा
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि उदयपुर भी एक आदिवासी बाहुल्य जिला है।अधिकारी ज्यादा से ज्यादा फील्ड का दौरा करें और जनजाति इलाकों में रात्रि विश्राम करें, ताकि आदिवासियों की समस्याओं का पता चले। सभी अधिकारी पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करें। आदिवासी मेहनती और स्वभाव से सरल होते हैं, वे अपनी समस्याएं बताने में झिझकते हैं। इसलिए अनुसूचित जनजाति वर्ग के उत्थान के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता है। बड़ी संख्या में वनाधिकार दावे निरस्त होने पर आयोग अध्यक्ष ने असंतोष जताया और रिव्यू के निर्देश दिए।

विभिन्न योजनाओं को लेकर भी दिए निर्देश
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि जिनको वनाधिकार के पट्टे दिए गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ दिलाना सुनिश्चित किया जाए। जो लोग इस लाभ से वंचित है उनको एक माह में लाभ दिलवाएं। आयोग अध्यक्ष ने पर्यावरण संरक्षण के लिए जिले में मनरेगा के तहत प्रधानमंत्री सड़क योजना और स्टेट हाइवे के किनारे खाली जमीन पर नीम, करंजी और महुवा के पेड़ लगाने का सुझाव भी दिया।
एसटी वर्ग में साक्षारता दर बढ़ाने, छात्र-शिक्षक अनुपात, बालिका शिक्षा, ड्रॉपआउट, कुपोषण और संस्थागत प्रसव की स्थिति और जनजाति क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की उचित व्यवस्था करने को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए। बैठक में जिला परिषद सीईओ रिया डाबी ने विभिन्न योजनाओं की कार्य प्रगति की जानकारी दी।
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