मासूम भाई-बहन का भी एक साथ हुआ अंतिम संस्कार
- सिर्फ शिक्षक निलंबित किए, अधिकारियों की जिम्मेदारी कौन तय करेगा
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की छत गिरने से अकाल मौत का शिकार हुए 7 मासूम स्कूली बच्चों का आज शनिवार को अंतिम संस्कार किया गया। इनमें दो सगे भाई बहन भी शामिल है। Jhalawar school roof collapse : classrooms become death bed, sky crying on system
जर्जर सरकारी सिस्टम के कारण हुए इस हादसे में मारे गए मासूम बच्चों की आज जब पीपलोदी गांव में अंतिम यात्रा निकली तब हल्की बारिश हो रही थी। गमगीन माहौल में ऐसा लग रहा था, मानों आज सरकारी सिस्टम के इस गुनाह से दुखी होकर बादल भी रो रहे हो। हादसे में मारे गए 7 बच्चों में से 6 बच्चे पीपलोदी गांव के थे, जबकि एक बच्चा इसी क्षेत्र के दूसरे गांव का था। हादसे में दो सगे भाई-बहन की भी मौत हुई है। घायल 20 बच्चों का अभी अस्पताल में इलाज चल रहा है। जिन बच्चों को कम चोट लगी थी, उन बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई है।
मौत, मुआवजा और मातम
इस हादसे में 7 बच्चों (3 बालिकाएं और 4 बालक) की मौत ने हर किसी को झंकझौर कर रख दिया है। राज्य सरकार ने मृतक बच्चों के परिवारजनों को 10-10 लाख रूपए का मुआवजा देने का एलान किया है, लेकिन जिन परिवारों में आज मातम छाया है, उनकी आत्मा बार-बार जिम्मेदारों से एक ही सवाल पूछ रही है कि इस मुआवजे से क्या उनके बच्चे वापस लौट आएंगे ?।
शिक्षक निलंबित हो गए, अधिकारियों की जिम्मेदारी कौन तय करेगा
इस हादसे के बाद राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश के साथ ही पिपलोदी स्कूल के पांच शिक्षकों को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है। लापरवाही बरती है तो तत्काल एक्शन होना भी चाहिए। लापरवाह कार्मिकों के प्रति किसी प्रकार की सहानुभूति रखने की कोई जरूरत भी नहीं है।
हालांकि एक बड़ा सवाल यह भी है कि ऐसे मामलों में जिला शिक्षा अधिकारी और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के साथ ही ब्लॉक और उपखंड स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों की भी कुछ तो जवाबदेही बनती होगी। उनके खिलाफ भी आरंभिक तौर पर तत्काल एक्शन होता तो पूरे राजस्थान में एक मैसेज जाता कि लापरवाही बरती तो खामियाजा भुगतना पड़ेगा, चाहे कितना बड़ा अधिकारी हो।
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