लकी जैन, उदयपुर। पशुओं में खासकर कुत्तों की वफादारी की कई कहानियां हैं, जिन कहानियों ने इंसानी और कुत्तों के संबंधों को काफी गहरा किया है, लेकिन इस बीच ऐसी कई घटनाएं भी हुई हैं, जिसमें आवारा कुत्तों द्वारा इंसानों पर किए हमले की घटनाओं में इंसानों को काफी नुकसान पहुंचा है। dog bite cases reported in india 22 lakh in last year
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एकीकृत स्वास्थ्य सूचना प्लेटफॉर्म पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार देश में बीते एक वर्ष जनवरी से दिसंबर 2024 में कुत्तों के इंसान को काटने की 21 लाख 95 हजार 122 घटनाएं हुई हैं, इसमें 37 लोगों की तो मौत तक हो गयी। इसमें भी 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कुत्ते के काटने के 5 लाख 19 हजार 704 मामले सामने आए। कुत्तों के अलावा कई शहरों में बंदरों सहित अन्य पशुओं का भी काफी आतंक है। आंकड़ों के अनुसार बीते वर्ष बंदर सहित अन्य पशुओं के इंसान को काटने की 5 लाख 4 हजार 728 घटनाएं हुईं, इनमें 11 लोगों की जान चली गयी।
ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सरकारी स्तर पर हो रहे प्रयास
कुत्तों और बंदरों जैसे आवारा पशुओं के काटने की घटनाओं की रोकथाम के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश में रेबीज की रोकथाम और नियंत्रण के लिए सभी राज्यों में 12वीं पंचवर्षीय योजना से राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (एनआरसीपी) लागू किया है। कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2030 तक भारत को रेबीज मुक्त बनाने का लक्ष्य है। जिसके लिए कई स्तर पर कार्य हो रहे हैं।
- रेबीज उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीआरई) को लागू किया।
- परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा बजट के जरिए राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए सहायता दी जा रही है।
- चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए गए हैं। 1.19 लाख से अधिक चिकित्सा अधिकारियों और पैरा पशु चिकित्सकों को रेबीज की रोकथाम में प्रशिक्षित किया
- कुत्ते के काटने के पीड़ितों के बेहतर इलाज के लिए पिछले तीन वर्षों में राज्यों के जिलों में 279 मॉडल एंटी-रेबीज क्लीनिक स्थापित किए गए।
- राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम की प्रगति की निगरानी के लिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर संयुक्त संचालन समितियां बनाई गई हैं।
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