सर्वाधिक घटनाएं सवाई माधोपूर व राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में
देवेंद्र शर्मा,(एआर लाइव न्यूज उदयपुर)। राजस्थान पिछले पांच साल में वन्यजीवों के हमले से कुल 25 लोगों की मौत हुई है। इनमें एक महिला और एक लड़की भी शामिल है। वन्यजीवों के हमले में मारे गए 25 लोगों में से तीन लोगों के परिजनों को मुआवजा दिया जाना अभी शेष है।(wild animals attacks in wildlife sanctuaries)
वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 2019-2022 से 2024 तक वन्यजीवों के हमले से कुल 25 लोगों की मौत हुई है। पांच साल में सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य में 2019 में वन्यजीव के हमले से एक व्यक्ति की मौत हुई। कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य में 2012 में एक और 2022 में एक व्यक्ति की वन्यजीव के हमले से मौत हुई।
बस्सी वन्यजीव अभयारण्य में 2018 में एक और 2021 में वन्यजीव के हमले से दो लोगों की मौत हुई। सवाई माधोपूर वन्यजीव अभयारण्य में 2019 में दो लोगों की, 2020 में एकए 2021 में दोए 2022 में एक और 2023 में वन्यजीव के हमले से दो लोगों की मौत हुई है।(wild animals attacks in wildlife sanctuaries)
तीन लोगों के परिजनों को मुआवजा देना शेष है
कैलादेवी वन्यजीव अभयारण्य में 2022 में वन्यजीव के हमले से चार लोगों की मौत हुई। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में 2020 में तीन लोगों कीए 2021 में एक कीए 2022 में एक और 2023 में तीन लोगों की मौत हुई है। वन विभाग ने मुआवजे को लेकर जानकारी दी है कि इन मामलों में तीन लोगों के परिजनों को मुआवजा देना शेष है। अन्य सभी मामलों में 4लाख से 5 लाख तक मुआवजा दिया गया है।
वन्यजीवों के हमले से रोकने विभाग स्तर पर यह उपाय किए जाते है
विधायक के सवाल के जवाब में वन विभाग ने बताया है कि वन्यजीवों के हमलो को रोकने के लिए वन्यजीवों के लिये हैबीटाट इम्प्रुवमेंटए प्रे.बेस बढ़ाने के कार्य तथा पिंच पीरियड़ में पेयजल की व्यवस्था की जाती है। संवेदनशील क्षेत्रों में कैमरा ट्रेप के माध्यम से वन्यजीवों की मॉनिटरिंग की जाती है। वन क्षेत्र के आसण्पास रहने वाले लोगों में जागरूकता हेतु प्रचार प्रसार का कार्य किया जाता है।
संरक्षित क्षेत्रों में ग्रामीणों के प्रवेश पर रोक लगानाए जंगली जानवरों की नियमित निगरानी व त्वरित बचाव अभियान जैसे प्रयास भी किए जा रहे है। वन विभाग के अनुसार संवेदनशील क्षेत्रों में पक्की चार दीवार निर्माण कार्य व जल निकायों और प्रवेश द्वारों पर व वन क्षेत्रों के बाहर चेतावनी बोर्ड लगाने जैसे उपाय भी किए जाते है।
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