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चुनावी बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, कहा यह असंवैधानिक

Lucky Jain by Lucky Jain
February 15, 2024
Reading Time: 1 min read
supreme court order on electoral bond scheme


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एसबीआई 6 मार्च तक जारी करे 2019 से अब तक का हिसाब

नई दिल्ली,(एआर लाइव न्यूज)। सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को चुनावी बॉन्ड योजना (electoral bond scheme) को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए चुनावी बॉन्ड पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक बताया और कहा कि यह आरटीआई का उल्लंघन है, बॉन्ड की गोपनीयता बनाए रखना असंवैधानिक है। राजनीतिक पार्टियों को मिल रहे चंदे की आमजनता को जानकारी होना बेहद जरूरी है।

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने योजना पर रोक लगाते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को निर्देशित किया है कि वह 6 मार्च 2024 तक 2019 से लेकर अब तक खरीदे गए बॉन्ड की डिटेल चुनाव आयोग को दे। चुनाव आयोग को 31 मार्च 2024 तक चुनावी बॉन्ड की डिटेल वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। SBI को डिटेल में राजनीतिक दलों का ब्योरा भी देना होगा, जिन्हें इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा मिला है। हर चुनावी बॉन्ड की डिटेल और राजनीतिक दल द्वारा उसे कैश करने की तारीख तक चुनाव आयोग को वेबसाइट पर देनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में यह भी कहा कि इसके लिए एक्ट में किए गए संशोधन भी असंवैधानिक कदम है, इससे कंपनियों की ओर से राजनीतिक दलों को असीमित फंडिंग का रास्ता खुला।

केन्द्र सरकार 2017 में लायी थी चुनावी बॉन्ड स्कीम

केन्द्र सरकार बजट-2017 में चुनावी या इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम लेकर आयी थी, जिसे जनवरी 2018 तक केन्द्र सरकार ने नोटिफाई कर दिया था। एसबीआई की चुनी हुई ब्रांच से 1 हजार से 1 करोड़ रूपए तक का एक चुनावी बॉन्ड खरीदा जा सकता था। यह बॉन्ड कोई भी आम नागरिक या कंपनी खरीद सकती है और अपनी पसंद की पार्टी को डोनेट कर सकता है। राजनीतिक बॉन्ड के लिए वही पार्टी योग्य हो सकती है जिस पार्टी पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनाव में कम से कम 1 प्रतिशत वोट मिला हो। बैंक से बॉन्ड खरीदते समय बॉन्ड खरीददार को अपनी केवाईसी डिटेल बैंक को देनी होती थी। बॉन्ड जिस भी पार्टी को डोनेट हुआ है, उस पार्टी को 15 दिन के अंदर के अंदर बॉन्ड पार्टी के वैरिफाइड बैंक अकाउंट से कैश करवाना होता है।

आरोप लगा था स्कीम को बड़े कॉर्पोरेट घरानों को ध्यान में रखकर लाया गया

चुनावी बॉन्ड स्कीम के 2017 की बजट घोषणा मे आने के बाद से ही इसका विरोध शुरू हो गया था। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रटिक रिफॉर्म्स ने इस योजना पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। आरोप लगाय गया था कि यह योजना कॉर्पोरेट घरानों को ध्यान में रखकर लायी गयी है। कॉर्पोरेट कंपनिया अपनी पहचान उजागर किए बगैर ही जितनी मर्जी उतना चंदा राजनीतिक पार्टियों दे सकेंगी। इस योजना की खासबात यही थी कि बॉन्ड डोनेट करने वाले को टैक्स में रिबेट मिलती थी और उसकी पहचान गुप्त रखी जाती थी।

डिसक्लेमर: एआर लाइव न्यूज (AR Live News) से मिलते-जुलते नामों से रहें सावधान, उनका एआर लाइव न्यूज से कोई संबंध नहीं है। एआर लाइव न्यूज के संबंध में कोई भी बात करने के लिए पत्रकार लकी जैन (9887071584) और पत्रकार देवेन्द्र शर्मा (9672982063) ही अधिकृत हैं।

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